हैदराबाद। भारत में डिजिटल मैसेजिंग (Digital Messaging) को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए भारती एयरटेल और गूगल (Bharti Airtel and Google) ने नई रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। इस पहल के तहत रिच कम्युनिकेशन सर्विस (RCS) मैसेजिंग में AI आधारित स्पैम फिल्टर और बिजनेस सेंडर वेरिफिकेशन सिस्टम जोड़ा जाएगा, जिससे खासकर एंड्रॉयड यूजर्स को अधिक सुरक्षित अनुभव मिल सके।
Google Messages ऐप के जरिए मिलेगा फायदा
यह सुविधा Google Messages ऐप के माध्यम से उपलब्ध होगी। एयरटेल अपनी टेलीकॉम नेटवर्क इंटेलिजेंस को गूगल के RCS प्लेटफॉर्म से जोड़ रही है, ताकि संदिग्ध कंटेंट को रियल-टाइम में पहचाना और रोका जा सके।
कंपनी के अनुसार, बिजनेस अकाउंट्स की सख्त जांच की जाएगी और किसी भी प्रमोशनल या ट्रांजैक्शनल मैसेज को भेजने से पहले उसकी वैधता सुनिश्चित की जाएगी।
AI से रियल-टाइम स्पैम डिटेक्शन
एयरटेल अपने AI आधारित स्पैम डिटेक्शन टूल्स को सीधे RCS फ्रेमवर्क में एकीकृत कर रही है। इससे संदिग्ध लिंक, फर्जी ऑफर या धोखाधड़ी से जुड़े संदेशों को तुरंत ब्लॉक या फिल्टर किया जा सकेगा। साथ ही, असली बिजनेस सेंडर की पहचान टेलीकॉम स्तर पर वेरिफाई की जाएगी, जिससे यूजर्स को भरोसेमंद मैसेज ही मिलें।
नई व्यवस्था के बावजूद RCS के लोकप्रिय फीचर्स-जैसे हाई-रेजोल्यूशन फोटो-वीडियो शेयरिंग, टाइपिंग इंडिकेटर, रीड रिसीट और मैसेज रिएक्शन-पहले की तरह उपलब्ध रहेंगे। फर्क सिर्फ इतना होगा कि अब इन सुविधाओं के साथ एक अतिरिक्त सुरक्षा परत जुड़ जाएगी।
स्पैम पर बड़ी कार्रवाई का दावा
एयरटेल का कहना है कि पिछले 18 महीनों में उसके AI सिस्टम ने 71 अरब से अधिक स्पैम कॉल्स और 2.9 अरब स्पैम SMS ब्लॉक किए हैं। कंपनी के अनुसार, इन उपायों से उसके नेटवर्क पर रिपोर्ट होने वाले वित्तीय नुकसान में करीब 68.7% की कमी आई है।
हालांकि, कंपनी ने यह भी संकेत दिया कि कुछ ओवर-द-टॉप (OTT) मैसेजिंग प्लेटफॉर्म अभी टेलीकॉम-ग्रेड सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते, जिससे जोखिम बना रहता है।
मल्टी-लेयर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क
नई RCS प्रणाली में कई स्तर की सुरक्षा शामिल होगी, जैसे:
टेलीकॉम आधारित बिजनेस सेंडर वेरिफिकेशन
DND (Do Not Disturb) नियमों का पालन
प्रमोशनल और ट्रांजैक्शनल मैसेज की अलग पहचान
संदिग्ध लिंक की मल्टी-लेयर जांच
यदि कोई सेंडर AI सिस्टम में संदिग्ध पाया जाता है, तो उसके मैसेज सीमित या पूरी तरह ब्लॉक किए जा सकते हैं।
दोनों कंपनियों का कहना है कि यह साझेदारी दिखाती है कि टेलीकॉम ऑपरेटर और टेक कंपनियां मिलकर भारत के डिजिटल मैसेजिंग इकोसिस्टम को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बना सकती हैं।
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