नई दिल्ली। देश में शहरी ट्रैफिक और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी (Last-mile connectivity) की समस्या को दूर करने के लिए सरकार जल्द ही ड्राइवरलेस पॉड टैक्सी सेवा शुरू करने की तैयारी में है। यह भारत की पहली पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (PRT) आधारित पॉड टैक्सी परियोजना होगी, जिसकी शुरुआत सबसे पहले नोएडा और मुंबई से किए जाने की योजना है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के नोएडा और महाराष्ट्र के मुंबई में इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर जमीनी स्तर पर काम शुरू हो चुका है। सरकार का उद्देश्य एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशन और व्यावसायिक क्षेत्रों के बीच तेज, सुविधाजनक और जाम-मुक्त यात्रा उपलब्ध कराना है।
नोएडा में यह सेवा जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को सेक्टर-21 में विकसित हो रही फिल्म सिटी और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों जैसे टॉय पार्क और टेक्सटाइल पार्क से जोड़ेगी। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028 के मध्य तक इस परियोजना को यात्रियों के लिए शुरू करना है।
पॉड टैक्सी का अनुमानित किराया करीब 8 रुपये प्रति किलोमीटर हो सकता है। हालांकि, अंतिम किराया संचालन शुरू होने के समय तय किया जाएगा।
मुंबई के बीकेसी में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी पर जोर
मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में मेट्रो और लोकल स्टेशन से ऑफिस तक की यात्रा को आसान बनाने के लिए पॉड टैक्सी प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है। अप्रैल 2026 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा परियोजना के पहले चरण का भूमिपूजन किए जाने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।
क्या होगी पॉड टैक्सी की खासियत?
यह ड्राइवरलेस और पूरी तरह इलेक्ट्रिक टैक्सी होगी, जिसमें एक बार में 4 से 6 यात्री सफर कर सकेंगे। सभी पॉड वातानुकूलित होंगी और अधिकतम 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी। यात्रियों को हर 5 मिनट में पॉड उपलब्ध कराने की योजना है।
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यह लिफ्ट की तरह काम करेगी। यात्री स्टेशन पर अपनी मंजिल का चयन करेगा और पॉड केवल उसी स्टेशन पर रुकेगी, बीच के स्टॉप पर नहीं।
एआई और सेंसर तकनीक से होगा संचालन
पॉड टैक्सी दो आधुनिक तकनीकों पर आधारित होगी। इसमें लगे सेंसर रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहचानेंगे, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और कंप्यूटर एल्गोरिदम यह तय करेंगे कि किस रूट पर कितनी पॉड टैक्सियों की जरूरत है।
इनका संचालन केंद्रीय कंट्रोल रूम से किया जाएगा और ये जमीन से 5 से 10 मीटर ऊंचे एलिवेटेड गाइडवे ट्रैक पर चलेंगी।
पर्यावरण के अनुकूल होगा सिस्टम
बैटरी आधारित यह सेवा जीरो-कार्बन उत्सर्जन प्रणाली पर आधारित होगी। इसमें रबर टायर या मैग्नेटिक ट्रैक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे आवाज बेहद कम होगी और प्रदूषण पर भी नियंत्रण में मदद मिलेगी।
दुनिया के इन शहरों में पहले से चल रही हैं पॉड टैक्सियां
दुनिया के कई देशों में पॉड टैक्सी सिस्टम पहले से सक्रिय है। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर अल्ट्रा पीआरटी लंबे समय से संचालित है। इसके अलावा अमेरिका की वेस्ट वर्जीनिया यूनिवर्सिटी, अबू धाबी के मसदार सिटी, दक्षिण कोरिया के सनचियोन और चीन के चेंगदू में भी यह तकनीक उपयोग में लाई जा रही है।
यदि नोएडा और मुंबई में यह परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में बेंगलुरु, दिल्ली और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों के व्यस्त इलाकों में भी इसका विस्तार किया जा सकता है।
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