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क्या ट्रंप की ‘जीत’ का दावा जल्दबाजी? जवाबी वार की क्षमता अभी भी रखता है ईरान

March 17, 2026

तेहरान। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा ईरान की सैन्य क्षमता (militaire capaciteite vaan Iran) को लगभग खत्म कर देने के दावे पर सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी प्रशासन (US Govt) भले ही “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को बड़ी सफलता बता रहा हो, लेकिन जमीनी हालात कुछ और संकेत दे रहे हैं।

दावों के बीच जारी हमले
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर ने हाल ही में ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की पुष्टि की है। वहीं सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में भी मिसाइल अलर्ट जारी किए गए। अबू धाबी में एक मिसाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत की खबर भी सामने आई है।

हमले कम, लेकिन खतरा बरकरार
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के हमलों में कमी जरूर आई है, लेकिन उसकी क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

  • शुरुआती 24 घंटों में 167 मिसाइल और 541 ड्रोन दागे गए

  • 15वें दिन यह घटकर 26 मिसाइल और करीब 50 ड्रोन रह गया

  • पेंटागन के अनुसार मिसाइल लॉन्च 90% और ड्रोन हमले 86% तक घटे

इसके बावजूद ईरान सीमित लेकिन सटीक हमले करने में सक्षम बना हुआ है।

मिसाइल भंडार अभी भी बड़ा
ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस के पुराने आकलन के अनुसार, ईरान के पास क्षेत्र का सबसे बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल भंडार है। अनुमान है कि पहले यह संख्या करीब 3000 थी, जो हालिया संघर्षों के बाद घटकर लगभग 2500 रह गई।

भूगोल और मोबाइल लॉन्चर चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के विशाल भूगोल और गुप्त ठिकानों में छिपे मोबाइल लॉन्चर अमेरिकी हमलों के बावजूद पूरी तरह खत्म नहीं किए जा सके हैं। यही कारण है कि ईरान अब छोटे लेकिन रणनीतिक हमले कर रहा है।

रणनीति: ‘थकावट का युद्ध’
विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान अब सीधे बड़े हमलों की बजाय “वॉर ऑफ एट्रिशन” यानी थकावट की रणनीति अपना रहा है। इसका मकसद है—

  • विरोधी देशों की एयर डिफेंस क्षमता को धीरे-धीरे कमजोर करना

  • सीमित संसाधनों के साथ लंबे समय तक दबाव बनाए रखना

ड्रोन बने बड़ी ताकत
ईरान के कम लागत वाले ड्रोन, जैसे शाहेद-136, इस रणनीति का अहम हिस्सा हैं। ये ड्रोन सस्ते, आसानी से तैयार होने वाले और कई बार एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम माने जाते हैं।

हालांकि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात बताते हैं कि ईरान अभी भी जवाबी कार्रवाई की क्षमता रखता है। ऐसे में ट्रंप की ‘पूर्ण जीत’ की घोषणा को कई विशेषज्ञ जल्दबाजी मान रहे हैं।

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