तेहरान/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (wes-azië) में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Straat vaan Hormuz) पर संकट के बीच ईरान (Iran) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ईरान ने भारत के सामने एक तरह की “एक हाथ ले, एक हाथ दे” वाली शर्त रखी है।
क्या है कथित शर्त?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने कहा है कि वह भारतीय जहाजों को सुरक्षित आवाजाही की अनुमति देगा, लेकिन इसके बदले भारत को जब्त किए गए तीन टैंकरों—
एस्फाल्ट स्टार
अल जाफजिया
स्टेलर रूबी
को रिहा करना होगा।
इन टैंकरों को भारत ने फरवरी में कथित तौर पर पहचान छिपाने और अवैध जहाज-से-जहाज तेल ट्रांसफर के आरोप में जब्त किया था।
भारत ने दावे को बताया ‘निराधार’
हालांकि भारत सरकार के सूत्रों ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि भारत और ईरान के बीच हाल में ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है।
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में जिन जहाजों का जिक्र है, वे ईरान के स्वामित्व में भी नहीं हैं, इसलिए इस तरह की किसी शर्त का सवाल ही नहीं उठता।
दवाओं की आपूर्ति की भी मांग?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान ने कुछ दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति की मांग भी रखी है। हालांकि इस पर भी भारत की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
भारतीय जहाज सुरक्षित, सप्लाई जारी
इस बीच भारत के लिए राहत की खबर यह है कि लगभग 40,000 मीट्रिक टन LPG लेकर भारतीय जहाज ‘शिवालिक’ सुरक्षित रूप से गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंच गया।
इसके अलावा 81,000 टन कच्चा तेल लेकर ‘जग लाडकी’ नाम का जहाज भी सुरक्षित भारत की ओर बढ़ रहा है।
समुद्री क्षेत्र में हालात स्थिर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
फारस की खाड़ी में 22 भारतीय जहाज मौजूद हैं
इनमें 611 भारतीय नाविक सवार हैं
पिछले 24 घंटों में कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई
सीधी बातचीत पर भारत का जोर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि मौजूदा हालात में ईरान से सीधे संवाद के जरिए ही समाधान निकाला जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि वैश्विक तेल व्यापार का करीब 20% होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है, इसलिए इसकी सुरक्षा बेहद अहम है।
फिलहाल ‘केस-बाय-केस’ व्यवस्था
सरकार के अनुसार, अभी सभी जहाजों के लिए कोई व्यापक व्यवस्था नहीं बनी है और आवाजाही फिलहाल “मामले-दर-मामले” के आधार पर मैनेज की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि होर्मुज संकट के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक संतुलन बनाए रखना भारत के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved