
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में जासूसी (spying) से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क (International Network) का खुलासा हुआ है। गाजियाबाद (Ghaziabad) पुलिस द्वारा शामली (Shamli) के समीर समेत अन्य आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि पाकिस्तान (Pakistan) की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े लोग विदेशों में बैठकर भारतीय युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे थे। यह नेटवर्क नेपाल, दुबई, अमेरिका और बांग्लादेश से संचालित हो रहा था।
व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ते थे युवक
पुलिस के अनुसार, समीर को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम और ISI हैंडलर सरफराज उर्फ ‘सरदार’ के जरिए बनाए गए व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुपों में जोड़ा गया था। इन ग्रुपों के माध्यम से देश-विदेश के युवाओं को जोड़ा जाता था और उन्हें अलग-अलग काम सौंपे जाते थे। दुबई में बैठे एजेंटों को शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, दिल्ली, सहारनपुर, बिजनौर के साथ-साथ हरियाणा और बिहार के युवाओं को नेटवर्क में जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी।
गैंगस्टर के नाम से चलाते थे नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ कि इन ग्रुपों को गैंगस्टरों के नाम पर इसलिए बनाया गया था, ताकि पुलिस को शक न हो और गतिविधियां आसानी से जारी रहें। ग्रुप में जुड़े युवाओं को धार्मिक स्थलों और सेना से जुड़े इलाकों की फोटो और वीडियो जुटाने के निर्देश दिए जाते थे।
हर तीसरे दिन जूम मीटिंग से होती थी समीक्षा
नेटवर्क को सक्रिय बनाए रखने के लिए हर तीसरे दिन जूम मीटिंग आयोजित की जाती थी। इन बैठकों में विदेशों में बैठे सरगना शामिल होते थे और युवाओं को दिए गए काम की समीक्षा करते थे। जांच एजेंसियों के रडार पर दुबई और नेपाल के 20 से अधिक एजेंट आ चुके हैं। एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े 250 से अधिक लोग पुलिस की निगरानी में हैं और जांच लगातार जारी है।
धार्मिक सामग्री से किया जाता था ब्रेनवॉश
जांच एजेंसियों ने बताया कि ग्रुपों में तबलीगी जमात और अन्य धार्मिक गतिविधियों से जुड़े वीडियो शेयर किए जाते थे, जिससे युवाओं को प्रभावित कर उनका ब्रेनवॉश किया जा सके। इसके अलावा उर्दू में लिखे दस्तावेज भी भेजे जाते थे।
पहचान छिपाने के लिए बदलते थे नाम
पुलिस जांच में सामने आया है कि ISI हैंडलर अपनी पहचान छिपाने के लिए हिंदू नामों का इस्तेमाल कर रहे थे। ‘सरदार’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप संचालित किया जा रहा था। बताया गया कि सरफराज ने खुद को ‘सरदार’ के रूप में पेश किया और कुछ सदस्य ऑनलाइन मीटिंग के दौरान माथे पर टीका लगाकर भी लोगों को भ्रमित करते थे।
तीन किश्तों में दिए गए पैसे
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि समीर को इस नेटवर्क की ओर से तीन किश्तों में कुल 5 हजार रुपये दिए गए। पहली दो किश्तों में 1500-1500 रुपये और तीसरी बार 2000 रुपये मिले। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह रकम कहां से भेजी गई थी। फिलहाल गाजियाबाद पुलिस और अन्य एजेंसियां पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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