
नई दिल्ली. अमेरिका (US) और ईरान (Iran) के बीच शनिवार को पाकिस्तान (Pakistan) में होने वाली शांति वार्ता से पहले व्हाइट हाउस (White House) के पूर्व प्रेस सचिव (Former Official) एरी फ्लेशर ने गंभीर चेतावनी जारी की है. फ्लेशर ने कहा कि पाकिस्तान में अमेरिकी वार्ताकारों, विशेषकर उपराष्ट्रपति (VP) जेडी वेंस की सुरक्षा को लेकर चिंता के पुख्ता कारण हैं.
उन्होंने अतीत के उदाहरण बताते हुए कहा कि पाकिस्तान को एक ऐसा देश बताया जो ‘हथियारों से लैस और खतरनाक’ है, जहां सरकार का पूरी तरह नियंत्रण नहीं है.
फ्लेशर ने याद दिलाया कि पाकिस्तान की हाई-लेवल यात्राएं हमेशा से जोखिम भरी रही हैं. उन्होंने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को अपनी यात्रा के दौरान ‘डेकॉय एयरक्राफ्ट’ (चकमा देने वाले विमान) का सहारा लेना पड़ा था और गुपचुप तरीके से विमान बदलने पड़े थे ताकि उनकी लोकेशन का पता न चल सके.
उन्होंने यह भी साझा किया कि 2006 में सीक्रेट सर्विस राष्ट्रपति बुश की पाकिस्तान यात्रा के भी खिलाफ थी.एरी फ्लेशर के अनुसार, यह मिशन अमेरिकी सीक्रेट सर्विस और सैन्य सुरक्षा के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है.
वार्ता पर इजरायल-लेबनान संकट का साया
दूसरी ओर, कूटनीतिक मोर्चे पर भी तनाव बढ़ गया है. बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सशर्त युद्धविराम पर सहमति बनी थी, जिसे स्थायी शांति में बदलने के लिए इस्लामाबाद में बैठक प्रस्तावित है. लेकिन ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि लेबनान पर इजरायली हमले इस शुरुआती युद्धविराम का उल्लंघन हैं. तेहरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ये हमले नहीं रुके, तो पाकिस्तान में होने वाली बातचीत का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा.
पाकिस्तान ने वार्ता को सफल बनाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजधानी को छावनी में बदल दिया है. हालांकि, कूटनीति और सुरक्षा के बीच फंसी इस वार्ता के परिणाम पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता सफल होती है, तो यह पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है.
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