
तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। एक तरफ अमेरिका पूरी ताकत के साथ ईरान को झुकाने में लगा है। वहीं, ईरान अपनी मजबूत रणनीति से हर तरफ से अमेरिका को परेशान करने में लगा है। इसी क्रम में ईरान ने अमेरिका के साथ देने वालों देशों की मुश्किलें बढ़ा दी है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में उन सभी देशों पर आरोप लगाया है, जो अमेरिका और इस्राइल को अपने इलाके इस्तेमाल करने दे रहे थे। ईरान ने इन देशों से ही मुआवजा मांगने के लिए संयुक्त राष्ट्र पहुंचा है।
ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूतअमीर-सईद इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस को पत्र लिखकर कहा कि बहरीन, सऊदी अरब, कतर, यूएई और जॉर्डन ने अमेरिका-इस्राइल की कार्रवाई में मदद की। ईरान का दावा है कि इन देशों ने अपने क्षेत्र का इस्तेमाल हमलों के लिए होने दिया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
ईरान ने अपने पत्र में कहा है कि वह इस पूरे घटनाक्रम में पीड़ित है और उसने सिर्फ आत्मरक्षा का अधिकार इस्तेमाल किया है। उसने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत उसे अपने बचाव का पूरा अधिकार है और उस पर हुए हमले गैरकानूनी थे।
ईरान ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में इन देशों ने सीधे हमलों में भूमिका निभाई या अपने क्षेत्र का इस्तेमाल होने दिया। उसने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है और इससे इन देशों की जिम्मेदारी तय होती है।
ईरान ने अमेरिका द्वारा लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों को भी अवैध करार दिया है। उसने कहा कि यह उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के खिलाफ है। ईरान ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए खतरा हैं।
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और अमेरिका की कार्रवाई की निंदा करे। उसने कहा कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
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