
जबलपुर। केंद्र सरकार द्वारा गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना अब जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस शासकीय मेडिकल कॉलेज में कथित घोटाले के आरोपों में घिर गई है। मेडिकल कॉलेज में योजना के तहत वितरित की जाने वाली प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और नियम विरुद्ध भुगतान किए जाने की शिकायत अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो तक पहुंच गई है। शिकायत सामने आते ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप की स्थिति बन गई है। शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले को सार्वजनिक धन के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और सरकारी योजना में वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला बताते हुए ईओडब्ल्यू से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार भारत शासन द्वारा संचालित आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अस्पतालों एवं मेडिकल संस्थानों में कार्यरत चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और नर्सिंग स्टाफ को योजना के सफल संचालन के लिए निर्धारित नियमों के तहत प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। आरोप है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में इस राशि के वितरण के दौरान नियम-कायदों को ताक पर रखकर मनमानी की गई। शिकायत में मेडिकल कॉलेज की वर्तमान प्रोफेसर एवं तत्कालीन प्रभारी डीन डॉ. गीता गुईन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने पद, अधिकार और प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए आयुष्मान योजना की राशि वितरण प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय गड़बडिय़ां कीं।
शिकायत में लगाए ये आरोप
बिना स्वीकृति राशि वितरणआरोप है कि सक्षम प्राधिकारी की विधिवत अनुमति या स्वीकृति लिए बिना ही प्रोत्साहन राशि का वितरण कर दिया गया।. नियमों की खुली अनदेखीशासन द्वारा तय वित्तीय प्रक्रिया, प्रशासनिक नियमों और भुगतान प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।. पात्रों को दरकिनार, अपात्रों को लाभशिकायत में दावा किया गया है कि जिन कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि मिलनी चाहिए थी, उन्हें नजर अंदाज कर अपात्र व्यक्तियों को आर्थिक लाभ पहुंचाया गया।. सरकारी धन का अपारदर्शी उपयोगसरकारी राशि के उपयोग में पारदर्शिता नहीं रखी गई और मनमाने तरीके से भुगतान किए गए।. रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंकादस्तावेजों में कूटरचना, तथ्यों को छिपाने और पद के प्रभाव का उपयोग कर रिकॉर्ड प्रभावित किए जाने की संभावना भी जताई गई है।
किन कानूनों के उल्लंघन का आरोप
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले में कई गंभीर कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन का हवाला दिया है—भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018)भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक न्यासभंग संबंधी धाराएं मध्यप्रदेश वित्तीय संहिता एवं कोषालय नियम मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम का उल्लघंन का आरोप लगाया गया है।
ईओडब्ल्यू से की गई बड़ी मांगें
शिकायतकर्ता ने आर्थिक अपराध शाखा से मांग की है कि पूरे प्रकरण की विस्तृत आर्थिक अपराध जांच कराई जाए। डॉ. गीता गुईन के प्रभारी डीन कार्यकाल के दौरान वितरित सभी प्रोत्साहन राशियों की जांच हो बैंक लेन-देन, लाभार्थी सूची, भुगतान रिकॉर्ड और प्रशासनिक आदेशों का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए मामले में शामिल अधिकारी /कर्मचारियों की भूमिका भी चिन्हित की जाए शासन को हुई आर्थिक क्षति की रिकवरी की जाए रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए संरक्षणात्मक आदेश जारी किए जाएं।
मेडिकल कॉलेज में मचा हड़कंप
शिकायत के ईओडब्ल्यू तक पहुंचने के बाद मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है। सूत्रों के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए कई अधिकारी बैकफुट पर हैं और दस्तावेजों की समीक्षा शुरू हो गई है।
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