
आर्थिक रूप से कमजोर आवंटिती कई वर्षों से काट रहे थे चक्कर, विधिक अभिमत के साथ बोर्ड द्वारा लिए निर्णय के आधार पर संकल्प पारित, अन्य लीजधारकों को भी मिल सकेगा लाभ
इंदौर। बीते कई वर्षों से जनसुनवाई (Public Hearing) से लेकर प्राधिकरण (IDA) के दफ्तरों में चक्कर काटने के बाद आखिरकार योजना 78 अरण्य (Scheme 78 Forest) के निम्न तबके के साढ़े 3 हजार कोर हाउस आवंटितों को लीज नवीनीकरण का लाभ देने का निर्णय लिया गया। पिछले दिनों हुई प्राधिकरण बोर्ड मीटिंग के बाद जारी संकल्प के तहत इन आवंटितों को सशर्त लीज नवीनीकरण का लाभ दिया जाएगा, जिसमें 2 साल के भीतर नगर निगम से भवन अनुज्ञा प्राप्त करना होगी। अभी तक भवन अनुज्ञा मंजूर ना होने के कारण लीज नवीनीकरण की कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। मगर वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के बाद निर्णय लिया कि नगर निगम भी इन लीज धारकों को भवन अनुज्ञा देने में सहयोग करेगा। प्राधिकरण संभवत: शिविर लगाकर लीज नवीनीकरण का लाभ देगा और इसी तर्ज पर नगर निगम भी भवन अनुज्ञा को लेकर निर्णय ले सकता है।
प्राधिकरण की कई योजनाओं में लीज निरस्ती के सैकड़ों प्रकरण चल रहे हैं, जिनमें कोर्ट कचहरी से लेकर बोर्ड के समक्ष भी ये मामले रखे जाते हैं, जिनमें योजना 78 अरण्य के कोर हाउस आवंटित भी शामिल रहे हैं। बीते कई वर्षों से जनप्रतिनिधियों के माध्यम से भी ये आवंटिती प्राधिकरण दफ्तर के चक्कर काटते रहे। मगर अभी तक सिर्फ उन्हें आश्वासन ही मिलते रहे। मगर यह पहला मौका है, जब प्राधिकरण में काबिज अफसरों ने आर्थिक रूप से कमजोर इन आवंटितों के लिए मानवीय रूप से फैसलालिया और तय किया कि इन्हें शर्तों के साथ लीज नवीनीकरण का लाभ दिया जाए। दरअसल निम्र आय वर्ग के लोगों को आसान किश्तों पर 1989 से इन कोर हाउसों का आवंटन शुरू किया गया था। तीन श्रेणी में ये कोर हाउस निर्मित किए गए, जिसमें टाइप-1 में कुल क्षेत्रफल 35.32 वर्गमीटर रखा गया, वहीं टाइप-2 में शौचालय, प्लिंस लेवल कुर्सी तक निर्मित क्षेत्रफल उपलब्ध करवाया, तो टाइप-3 में शौचालय के साथ रसोई घर और 18.17 वर्गमीटर प्लिंथ लेवल कुर्सी स्तर तक क्षेत्रफल निर्मित कर दिया गया। बाद में आवंटितों ने भवन निर्माण शुरू किया और निगम से बिना नक्शा मंजूर कराए जी प्लस-1 और जी प्लस-2 के निर्माण भी कर लिए। चूंकि कोर हाउस की प्रथम 30 साल की अवधि समाप्त हो गई थी, जिसके चलते निगम ने अभिन्यास मंजूरी पर रोक लगा दी और कहा कि प्राधिकरण पहले लीज नवीनीकरण करे। इस चक्कर में सालों से ये आवंटिती परेशान होते रहे और उसके बाद प्राधिकरण ने अतिरिक्त महाधिवक्ता इंदौर हाईकोर्ट राहुल सेठी से भी विधिक अभिमत प्राप्त किया, जो कि विभिन्न बिन्दुओं पर उसे मिला, जिसमें कहा गया कि पट्टा नवीनीकरण में पूरी तरह से निगम से निर्माण की स्वीकृति हासिल करना बाधक नहीं है और प्राधिकरण बोर्ड चाहे तो इस शर्त में छूट दे सकता है और उसके लिए एक समयावधि तय की जा सकती है। इसके अलावा प्राधिकरण पट्टा शर्त के उल्लंघन पर पैनल्टी भी लगा सकता है और चूंकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवंटितों के कल्याण के लिए यह निर्णय लिया जाना है। लिहाजा प्राधिकरण और नगर निगम दोनों समन्वित दृष्टिकोण अपना सकते हैं। विधिक अभिमत के बाद प्राधिकरण बोर्ड की पिछली बैठक में इस निर्णय को मंजूरी दी गई, जिसके आधार पर संकल्प भी जारी कर दिया गया। अब दो साल की समयसीमा इन कोर हाउस आवंटितों के पास रहेगी, जिसमें प्राधिकरण लीज नवीनीकरण करेगा और फिर दो साल में निगम से भवन अनुज्ञा प्राप्त करनी होगी। इस संबंध में प्राधिकरण सीईओ डॉ. परीक्षितझाड़े ने निगमायुक्त क्षितिज सिंघल से भी चर्चा की, ताकि इन लीज आवंटितों को निगम से भवन अनुज्ञा हासिल करने में समस्या ना आए। निगम ने भी इन आवंटितों को पूरी मदद करने की बात कही है।
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