img-fluid

कमर्शियल सिलेंडर के बाद अब पेट्रोल-डीजल और घरेलू रसोई गैस के दामों हो सकती है बढ़ोतरी, जानें क्या है कारण

May 02, 2026

नई दिल्ली. कमर्शियल सिलिंडर (Commercial cylinder) 993 रुपये महंगा हो गया। लेकिन, रसोई गैस सिलिंडर (domestic cooking gas) और पेट्रोल-डीजल (petrol, diesel) के दाम नहीं बढ़े। पहली नजर में यह राहत लगती है, लेकिन असली कहानी रोके हुए दबाव की है। बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की लागत बढ़ चुकी है और तेल कंपनियों पर नुकसान का बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार के सामने बड़ी चुनौती है कि आम उपभोक्ता को कब तक बचाया जा सकता है?

दिक्कत यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू कीमतों के बीच का अंतर अब बड़ा हो गया है। रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक, अगर कच्चा तेल 120-125 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहता है, तो पेट्रोल पर तेल कंपनियों का मार्केटिंग मार्जिन करीब 14 रुपये और डीजल पर 18 रुपये प्रति लीटर निगेटिव है। घरेलू एलपीजी पर भी दबाव तेज है। एजेंसी का अनुमान है कि मौजूदा अंडर-रिकवरी बनी रही, तो वित्त वर्ष 2026-27 में घरेलू एलपीजी पर तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।


  • यही आंकड़ा सरकार की मुश्किल बताता है। 2026-27 के बजट में एलपीजी सब्सिडी के लिए 11,085 करोड़ का प्रावधान है। इसमें गरीब परिवारों के एलपीजी कनेक्शन के लिए 9,200 करोड़ और पहल के तहत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के लिए 1,500 करोड़ रुपये शामिल हैं। अगर एलपीजी अंडर-रिकवरी 80,000 करोड़ के आसपास जाती है, तो यह मौजूदा बजट प्रावधान से कई गुना बड़ा बोझ होगा।

    सरकार ने पहले भी की है भरपाई: यह पहली बार नहीं है, जब ग्राहकों को बचाने की कीमत तेल कंपनियों ने चुकाई है। अगस्त, 2025 में कैबिनेट ने इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को घरेलू एलपीजी पर नुकसान की भरपाई के लिए 30,000 करोड़ की क्षतिपूर्ति मंजूर की थी।

    दबाव सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं: दबाव सिर्फ तेल कंपनियों तक सीमित नहीं है। इक्रा ने 2026-27 में उर्वरक सब्सिडी 2.05 से 2.25 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान लगाया है, जबकि बजट में 1.71 लाख करोड़ का प्रावधान है। यानी महंगी ऊर्जा का असर सरकारी खर्च, कंपनी मार्जिन और जनता की जेब…तीनों पर पड़ रहा है।

    सरकार के पास तीन रास्ते
    पेट्रोल-डीजल में भी कहानी ऐसी ही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, निकट भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। खुदरा कीमतें अप्रैल, 2022 से लगभग स्थिर हैं। इस बीच, कच्चा तेल इस सप्ताह 126 डॉलर प्रति बैरल तक गया और नरमी के बाद भी 110 डॉलर से ऊपर रहा। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये लीटर और डीजल 87.67 रुपये लीटर पर है। सरकार के पास अब तीन रास्ते हैं-

    पहला : तेल कंपनियों को नुकसान उठाने दिया जाए।
    दूसरा : बजट से फिर क्षतिपूर्ति दी जाए।
    तीसरा : कीमतें धीरे-धीरे बढ़ाई जाएं।

    पहले रास्ते से तेल विपणन कंपनियों की बैलेंसशीट कमजोर होगी। दूसरे से राजकोषीय बोझ बढ़ेगा और तीसरे से आम आदमी पर महंगाई का असर पड़ेगा।

    Share:

  • बंगाल में BJP को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद.... रिजल्ट बाद हिंसा से निपटने की तैयारियां शुरू...

    Sat May 2 , 2026
    कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद के बीच भाजपा (BJP) ने चुनाव बाद की स्थितियों से निपटने के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है। परिणाम जो भी हों, पार्टी के निर्वाचित विधायक बिना बुलाए अपना क्षेत्र नहीं छोंड़ेंगे। स्थानीय संगठन के नेताओं को भी […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved