
नई दिल्ली। साल 2026 में शनि जयंती (Shani Jayanti) 16 मई को मनाई जाएगी और इस बार यह दिन बेहद खास संयोग लेकर आ रहा है। इस बार ज्येष्ठ अमावस्या (Jyestha Amavasya) शनिवार को पड़ रही है, जिसे शनैश्चरी अमावस्या (Shanaishchari Amavasya) कहा जाता है। शनिवार स्वयं शनि देव का प्रिय दिन माना जाता है, ऐसे में इसी दिन उनका जन्मोत्सव होना इस तिथि के महत्व को और बढ़ा देता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह समय विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान चंद्रमा राशि परिवर्तन कर रहे हैं और ग्रहों की स्थिति भी अनुकूल बन रही है। यह संयोग खास तौर पर उन लोगों के लिए राहत लेकर आ सकता है, जो साढ़ेसाती और ढैय्या से प्रभावित हैं।
साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत के 5 असरदार उपाय:-
सरसों के तेल का चौमुखी दीपक
शनि जयंती की शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं और “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें। यह उपाय शनि देव को शांत करने में सहायक माना जाता है।
हनुमान जी की पूजा
मान्यता है कि हनुमान जी के भक्तों को शनि देव कष्ट नहीं देते। इसलिए इस दिन शनि मंदिर के साथ हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करना लाभकारी माना जाता है।
तेल में छाया देखकर दान
एक पात्र में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें और फिर उस तेल का दान करें। अमावस्या के दिन यह उपाय कुंडली के दोषों और बीमारियों को दूर करने में सहायक माना जाता है।
काली वस्तुओं का दान
शनि देव को काला रंग प्रिय है। इस दिन काले तिल, काली उड़द, लोहे के बर्तन या काले जूते दान करने से आर्थिक समस्याएं कम होती हैं और शनि का प्रभाव घटता है।
शमी वृक्ष की पूजा
शनि जयंती पर शमी के पौधे को जल अर्पित करें और दीपक जलाएं। शमी के पत्ते अर्पित करने से शत्रुओं पर विजय और रुके हुए कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है।
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