
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में संभावित सत्ता परिवर्तन के बीच मुख्यमंत्री चेहरे (Chief Minister) को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर मंथन तेज हो गया है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राज्य की कमान ऐसे नेता को सौंपी जाए जो संगठन के लिए मजबूत हो या फिर उस चेहरे को, जिसने जमीनी लड़ाई में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है।
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोलकाता दौरे की संभावना जताई जा रही है। वहीं शुक्रवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। इस बीच राज्य की राजनीति में तनाव तब और बढ़ गया जब चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या की खबर सामने आई, जिसने पूरे राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
CM रेस में कई नाम, लेकिन सबसे आगे शुभेंदु अधिकारी
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कई नामों पर चर्चा चल रही है। महिला चेहरे के तौर पर अग्निमित्रा पॉल और रूपा गांगुली के नाम सामने आ रहे हैं। संगठन के मजबूत चेहरों में शमिक भट्टाचार्य और दिलीप घोष भी शामिल हैं। लेकिन इन सभी के बीच सबसे ज्यादा चर्चा शुभेंदु अधिकारी की हो रही है। उन्हें पार्टी की ऐतिहासिक जीत का सबसे बड़ा चेहरा माना जा रहा है।
जीत के पीछे सबसे बड़ा चेहरा
शुभेंदु अधिकारी को भाजपा की इस कथित जीत का प्रमुख रणनीतिकार और जमीन पर सबसे मजबूत नेता माना जा रहा है। उन्होंने पहले ममता बनर्जी को नंदीग्राम में चुनौती दी थी और बाद में भवानीपुर सीट पर भी उन्हें राजनीतिक टक्कर देने की चर्चा में रहे। टीएमसी के पूर्व रणनीतिकार रह चुके शुभेंदु को बंगाल की राजनीति की गहरी समझ रखने वाला नेता माना जाता है। 2020 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया और सीधे तौर पर ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोला।
क्यों शुभेंदु को नजरअंदाज करना BJP के लिए मुश्किल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर भाजपा नेतृत्व उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाता, तो इसका असर संगठन और कार्यकर्ताओं पर पड़ सकता है। शुभेंदु अधिकारी ने लगातार जमीनी स्तर पर संघर्ष किया है और पार्टी के कार्यकर्ताओं में उनकी मजबूत पकड़ है। ऐसे में उन्हें दरकिनार करना असंतोष को जन्म दे सकता है। इसके अलावा उनके पास प्रशासनिक अनुभव भी है, क्योंकि वे पहले राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं। नौकरशाही और शासन व्यवस्था को समझने का उनका अनुभव नई सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या भाजपा करेगी सरप्राइज फैसला?
भाजपा का इतिहास रहा है कि वह कई बार अप्रत्याशित फैसले लेकर सभी को चौंका देती है। ऐसे में संगठन आधारित नेतृत्व या किसी नए चेहरे को भी मौका दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने है। अब सभी की नजरें भाजपा के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो बंगाल की राजनीति की दिशा तय करेगा।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved