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तमिलनाडु : विजय का शपथ ग्रहण फिर टला, 2 विधायक वाली पार्टी के नेता ने किया खेल; जानें…

May 09, 2026

नई दिल्ली. तमिलनाडु (Tamil Nadu) की सियासत (Politics) में शुक्रवार की शाम ऐसा मोड़ लेकर आई, जिसने पूरे सत्ता समीकरण को अचानक रहस्य और सस्पेंस से भर दिया. अभिनेता विजय (Vijay) की पार्टी TVK के लिए जो तस्वीर दिनभर तक लगभग साफ दिख रही थी, वह रात होते-होते धुंधली पड़ने लगी. सुबह से ही TVK खेमे में जश्न का माहौल था. पार्टी नेताओं और समर्थकों को भरोसा था कि कांग्रेस, CPI, CPI(M) और संभावित रूप से VCK व IUML के समर्थन के बाद बहुमत का आंकड़ा पार हो चुका है. विजय के पनायुर स्थित घर के बाहर पटाखे फूट रहे थे, कार्यकर्ता खुलेआम शनिवार सुबह शपथ ग्रहण की बातें कर रहे थे. लेकिन शाम ढलते-ढलते सत्ता का गणित लड़खड़ाने लगा.



  • असल पेच VCK प्रमुख थिरुमावलवन को लेकर फंसा. उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि उनकी पार्टी वाम दलों के फैसले के साथ जाएगी, लेकिन शुक्रवार देर रात तक उन्होंने राज्यपाल राजेंद्र अरलेकर को समर्थन का औपचारिक पत्र नहीं सौंपा. यही वजह रही कि तकनीकी तौर पर विजय की पार्टी बहुमत से पीछे रह गई. राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार शाम हुई बैठक में विजय के पास रिकॉर्ड पर केवल 116 विधायकों का समर्थन मौजूद था. यानी बहुमत के जादुई आंकड़े से अभी भी दूरी बनी हुई थी. इसी देरी ने राजनीतिक गलियारों में अफवाहों का तूफान खड़ा कर दिया.

    ‘पोलिटिकल थ्रिलर’ जैसी दिखाई दे रही तमिलनाडु की सियासत
    तमिलनाडु सियासी गलियारों से खबरें आने लगीं कि थिरुमावलवन लगातार TVK, AIADMK नेता एडप्पडी के पलानीस्वामी (EPS) और DMK नेताओं के साथ अलग-अलग दौर की बैठकों में जुटे हुए हैं. दिलचस्प बात यह रही कि मीडिया के सामने वाम दलों के साथ खड़े होने की बात दोहराने के बावजूद उन्होंने देर रात तक कोई अंतिम फैसला घोषित नहीं किया. इसके बजाय वे सीधे कार्यवाहक मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के आवास पहुंचे, जहां रात 10 बजे के बाद तक बातचीत जारी रही. इसके बाद तमिलनाडु की राजनीति किसी राजनीतिक थ्रिलर जैसी दिखने लगी.

    मधु सिंह कोड़ा की राह पर थिरुमावलवन!
    VCK से जुड़े कुछ हलकों में यह चर्चा तेज हो गई कि EPS और स्टालिन मिलकर ऐसा फॉर्मूला तलाश रहे हैं, जिसमें खुद थिरुमावलवन एक सर्वमान्य मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में सामने आ सकते हैं. इसी बीच एक और छोटे लेकिन अहम घटनाक्रम ने पूरे समीकरण को और उलझा दिया. NDA सहयोगी और AMMK प्रमुख टीटीवी दिनाकरन रात 9 बजे के बाद राज्यपाल से मिलने पहुंचे. उन्होंने आरोप लगाया कि विजय की TVK उनके विधायक को तोड़ने की कोशिश कर रही है. दिनाकरन ने दावा किया कि उनकी पार्टी के इकलौते विधायक कामराज ‘लापता’ हैं. दिनाकरन ने कहा, ‘मेरा विधायक फोन नहीं उठा रहा है. हो सकता है उसे हिरासत में लिया गया हो या उसका फोन छीन लिया गया हो. कामराज गायब हैं. मैंने राज्यपाल से तुरंत जांच की मांग की है.’

    राज्यपाल के सामने दिनाकरन का दावा ये पत्र फर्जी है
    तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) और टी.टी.वी. दिनाकरन के बीच अब खुलकर बयानबाजी शुरू हो गई है. विवाद की जड़ एक ऐसे पत्र को लेकर है, जिसमें AMMK के नवनिर्वाचित विधायक कमराज एस. द्वारा विजय की पार्टी को समर्थन देने की बात कही गई थी. दरअसल, AMMK प्रमुख दिनाकरन ने दावा किया कि यह पत्र फर्जी है और उनकी पार्टी ने TVK को किसी तरह का समर्थन नहीं दिया है. उन्होंने शुक्रवार को राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा और कहा कि उनके विधायक कमराज अब भी NDA और AIADMK गठबंधन के साथ हैं. दिनाकरन ने यह भी साफ किया कि मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी पार्टी का समर्थन एडप्पाडी के. पलानीस्वामी को है.

    TVK ने खारिज किए दिनाकरन के आरोप, जारी किया वीडियो
    दूसरी तरफ विजय की पार्टी TVK ने दिनाकरन के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया. पार्टी ने एक वीडियो जारी करते हुए दावा किया कि कमराज ने खुद खुशी-खुशी समर्थन पत्र लिखा था और ऐसा उन्होंने दिनाकरन की मंजूरी के बाद किया था. TVK ने आरोप लगाया कि सच्चाई छिपाकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है. TVK ने बयान में कहा कि पार्टी को किसी से ‘मोलभाव’ करने की जरूरत नहीं है. पार्टी का कहना है कि जनता ने उन्हें बड़ा जनादेश दिया है और सरकार बनाने के लिए समर्थन जुटाने की प्रक्रिया लोकतांत्रिक तरीके से हो रही है.

    सियासी गणित में उलझी तमिलनाडु की सियासत?
    234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में TVK ने 108 सीटें जीतकर बड़ा उलटफेर किया है, लेकिन बहुमत के आंकड़े 118 से वह अभी भी दूर है. ऐसे में पार्टी छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाने में लगी हुई है. कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के साथ समर्थन देने का संकेत दिया है, जबकि CPI और CPI(M) ने भी विजय की अगुवाई वाली सरकार के पक्ष में रुख दिखाया है. इससे राज्य में लंबे समय से चली आ रही DMK-AIADMK की पारंपरिक राजनीति को चुनौती मिलती दिखाई दे रही है.

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