
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कभी ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के बेहद करीबी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मजबूत नेता रहे शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) अब बीजेपी (BJP) के मुख्यमंत्री चेहरे (Chief Minister) के तौर पर सामने आए हैं। बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बड़ी सफलता मिलने के बाद पार्टी नेतृत्व ने शुभेंदु अधिकारी के नाम पर मुहर लगा दी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जमीन पर मजबूत पकड़, टीएमसी की अंदरूनी रणनीतियों की जानकारी और हिंदुत्व के मुद्दों पर आक्रामक रुख ने उन्हें बीजेपी का सबसे मजबूत विकल्प बना दिया।
ममता बनर्जी को दो बार दी सीधी चुनौती
शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल की राजनीति में अपनी अलग पहचान उस समय बनाई, जब उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके ही मजबूत राजनीतिक क्षेत्रों में कड़ी चुनौती दी। नंदीग्राम सीट पर 2021 के चुनाव में उन्होंने ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं। इसके बाद ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी ने यह साबित कर दिया कि वे सीधे तौर पर ममता बनर्जी को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं और बीजेपी के लिए सबसे मजबूत बंगाली चेहरा बन चुके हैं।
बीजेपी के चुनावी वादों में फिट बैठते हैं शुभेंदु
बीजेपी लंबे समय से बंगाल में ऐसे स्थानीय चेहरे की तलाश में थी, जो राज्य की राजनीति और संस्कृति दोनों से जुड़ा हो। पार्टी ने चुनाव के दौरान वादा किया था कि बंगाल का मुख्यमंत्री ऐसा व्यक्ति होगा, जो राज्य में जन्मा हो और बंगाल की संस्कृति से जुड़ा हो। इसके अलावा बीजेपी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड, बांग्लादेशी घुसपैठ पर सख्ती और हिंदुत्व के मुद्दों को भी अपने एजेंडे में प्रमुखता दी थी। शुभेंदु अधिकारी इन सभी मुद्दों पर खुलकर बोलते रहे हैं। ऐसे में पार्टी को लगा कि वे इन वादों को जमीन पर उतारने के लिए सबसे उपयुक्त नेता साबित हो सकते हैं।
प्रशासन और सरकार चलाने का अनुभव
शुभेंदु अधिकारी सिर्फ संगठनात्मक नेता ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुभव भी रखते हैं। टीएमसी सरकार में वे मंत्री रह चुके हैं और कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। बीजेपी के भीतर यह भी चर्चा है कि सरकार बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल को लेकर श्वेतपत्र जारी कर सकते हैं। साथ ही टीएमसी नेताओं से जुड़े मामलों की जांच के लिए आयोग गठित किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
हिंदुत्व की छवि ने बढ़ाई स्वीकार्यता
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि शुभेंदु अधिकारी की हिंदुत्व समर्थक छवि ने भी उन्हें बीजेपी और आरएसएस के बीच मजबूत समर्थन दिलाया। 2024 में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमलों के खिलाफ उन्होंने लगातार आवाज उठाई थी। नंदीग्राम और आसपास के क्षेत्रों में उन्हें हिंदुत्व के मजबूत चेहरे के तौर पर पेश किया गया। यही वजह है कि बीजेपी के साथ-साथ आरएसएस नेतृत्व भी उन्हें बंगाल में पार्टी के भविष्य के तौर पर देख रहा है।
कांग्रेस से टीएमसी और फिर बीजेपी तक का सफर
शुभेंदु अधिकारी राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी भी बंगाल की राजनीति के बड़े नेताओं में शामिल रहे और केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं। शुभेंदु ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस की छात्र राजनीति से की थी। बाद में ममता बनर्जी के साथ जुड़कर टीएमसी में अहम भूमिका निभाई। पूर्व मेदिनीपुर में उन्होंने वाम दलों के खिलाफ पार्टी को मजबूत किया। हालांकि, 2020 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया और इसके बाद बंगाल की राजनीति में तेजी से बीजेपी का बड़ा चेहरा बनकर उभरे।
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