
वैसे भी सड़क (road) के ट्रैफिक सिग्नल (traffic signal) पर पुलिस के जवान नहीं होते हैं… जो होते हैं वह काम नहीं करते हैं… जिसकी जहां से मर्जी आए वो वहां से घुसता है… ट्रैफिग सिग्नल तोड़ने को तो वो अपनी शान समझता है… कोई लैफ्ट टर्न (Left Turn) की परवाह नहीं करता… कोई नियम-कानून कायदे को नहीं समझता… ऐसे में यदि कोई जवान ड्यूटी कर फर्ज निभाए… सिग्नल पर तैनात नजर आए… तपती धूप में अपना जिस्म जलाए और किसी एक को रोकने की हिम्मत दिखाए और वो भाजपाई निकल जाए तो सत्ता के सारे बाहुबली थाना घेरने पहुंच जाए… और बेचारे पुलिस के ईमानदार जवान और अधिकारी हाथ जोड़ते नजर आए… सत्ता के नशे में चूर संस्कार, संस्कृति, अस्मिता जैसी बड़ी-बड़ी बातें करने वाले नेता अपनी ड्यूटी करने वाले अधिकारियों और जवानों को सजा दिलवाने और तबादला करवाने पर अड़ जाए और वरिष्ठ अधिकारी उनके बाहुबल के आगे सर झुकाए तो समझ लेना चाहिए कि इस शहर का ट्रैफिक क्यों बिगड़ा हुआ है और क्यों नहीं सुधर सकता… जिस शहर में ट्रैफिक ही नहीं सत्ता के तेवर बिगड़े हुए हैं… जिस शहर के नेता कानून के रेड सिग्नल को तोड़ने में शान समझते हो… जिस शहर के नेता अपने इशारों को हरी बत्ती समझते हो… जिस शहर में नेताओं की आंखों के लाल रंग से लोग डरते हो… उस शहर में तो मनमर्जी का ही ट्रेफिक चलेगा… क्यों कोई जवान किसी सिग्नल तोड़ने वाले को रोकेगा… क्यों कोई जवान किसी को हेलमेट पहनने की ताकीद करेगा… क्यों कोई मोबाईल पर बात करने वाले और जान जोखिम में डालने वाले को रोकेगा… जिसकी मर्जी आए वो वैसा चलेगा… क्योंकि रोकने से पहले यह पूछना पड़ेगा कि वह भाजपाई तो नहीं है… और फिर जिस शहर में भाजपा पकड़-पकड़कर लोगों को अपना सदस्य बनाए…. और शहर के आधे लोग भाजपा कार्यकर्ता होने का दंभ भरने लग जाए… उस शहर में लोग अपनी गाड़ी जैसी चाहे वैसी चलाए… जिस भाजपा को पूरे शहर की जनता चुनती ही नहीं, बल्कि पूजती भी है उस भाजपा के नेता यदि कानून तोड़ेंगे, अधिकारियों को मरोड़ेंगे, चक्काजाम कर जनता को परेशान करेंगे तो जनता को भी घमंड तोड़ने के लिए राम बनना पड़ेगा… तभी राम राज का मतलब निकलेगा….
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