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हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में भारत की बड़ी छलांग, स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण

May 10, 2026

नई दिल्ली। भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic missile) तकनीक की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) की Defence Research and Development Laboratory (DRDL) ने एक्टिवली कूल्ड फुल-स्केल स्क्रैमजेट कंबस्टर का 1200 सेकंड से अधिक समय तक सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण हैदराबाद स्थित SCPT सुविधा में किया गया, जिसे भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम के लिए अहम माना जा रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ ने इस सफलता को भारत की रक्षा क्षमता के लिए ऐतिहासिक कदम बताते हुए DRDO, वैज्ञानिकों, उद्योग साझेदारों और विश्वविद्यालयों की सराहना की।

20 मिनट तक चला इंजन
DRDO के मुताबिक स्क्रैमजेट कंबस्टर ने 1200 सेकंड यानी करीब 20 मिनट तक लगातार सफलतापूर्वक काम किया। इससे पहले जनवरी में इसी तकनीक का 700 सेकंड तक परीक्षण हुआ था। इस बार परीक्षण अवधि लगभग दोगुनी रही, जिसे बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है।



  • क्या है स्क्रैमजेट तकनीक?
    स्क्रैमजेट यानी सुपरसोनिक रैमजेट इंजन ऐसी अत्याधुनिक तकनीक है, जो हाइपरसोनिक गति पर काम करती है। यह इंजन हवा को बेहद तेज गति से भीतर लेकर उसे गर्म करता है और उसी से ऊर्जा पैदा करता है। सामान्य जेट इंजनों की तुलना में स्क्रैमजेट इंजन अत्यधिक ऊंचाई और बेहद तेज रफ्तार पर भी काम कर सकता है।

    हाइपरसोनिक मिसाइल कितनी तेज होती है?
    हाइपरसोनिक मिसाइलें आवाज की गति से पांच गुना या उससे अधिक रफ्तार से उड़ान भर सकती हैं। यानी यह Mach 5 से ज्यादा गति हासिल करती हैं।

    ऐसी मिसाइलों को रोकना बेहद कठिन माना जाता है क्योंकि वे बहुत कम समय में लक्ष्य तक पहुंच जाती हैं और रडार सिस्टम को चकमा देने की क्षमता रखती हैं।

    पूरी तरह स्वदेशी तकनीक
    DRDO ने बताया कि इस स्क्रैमजेट कंबस्टर में इस्तेमाल हुई प्रमुख तकनीकें पूरी तरह स्वदेशी हैं। इसमें तरल हाइड्रोकार्बन ऊष्माशोषी ईंधन, उच्च तापमान सुरक्षा कोटिंग और अत्याधुनिक निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया। इसके विकास में भारतीय उद्योगों और विश्वविद्यालयों ने भी सहयोग किया।

    सेना को मिलेगा बड़ा रणनीतिक फायदा
    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत सफलतापूर्वक हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित कर लेता है तो भारतीय सेना की स्ट्राइक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। ऐसी मिसाइलें दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली को भेदने और बेहद कम समय में लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम होती हैं।

    चुनिंदा देशों के क्लब में भारत
    दुनिया में अभी केवल कुछ ही देशों के पास हाइपरसोनिक हथियार तकनीक मौजूद है, जिनमें United States, Russia और China शामिल हैं। इस सफलता के बाद भारत भी इस रणनीतिक तकनीक वाले देशों की कतार में तेजी से आगे बढ़ता दिख रहा है।

    DRDO प्रमुख Sameer V. Kamat ने इस उपलब्धि को वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मेहनत का परिणाम बताते हुए पूरी टीम को बधाई दी है।

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