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सिर्फ टैक्स राहत नहीं, FTA से ग्लोबल सप्लाई चेन में भी मजबूत होगी

May 10, 2026

नई दिल्ली: भारत सरकार अब फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का फायदा सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहती. सरकार ऐसा प्लान तैयार कर रही है, जिससे भारतीय कंपनियां इन समझौतों का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा सकें और एक्सपोर्ट के साथ घरेलू मैन्युफैक्चरिंग भी तेजी से बढ़े.

2021 के बाद से भारत ने मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, UAE, ओमान, न्यूजीलैंड, EFTA देशों, यूरोपीय यूनियन (EU), ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों के साथ FTA किए हैं. इन 38 देशों का कुल आयात करीब 12 ट्रिलियन डॉलर का है, जिससे भारतीय कारोबारियों के लिए बड़ा बाजार खुला है.

इन समझौतों का फायदा खासतौर पर कृषि, टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल और फार्मा सेक्टर को मिल रहा है. इन सेक्टरों के कई प्रोडक्ट्स को पार्टनर देशों में ड्यूटी-फ्री एंट्री मिल रही है.

कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर Piyush Goyal इंडस्ट्री संगठनों, कारोबारियों और एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल्स के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं. उनका फोकस इस बात पर है कि कंपनियां FTA का सही इस्तेमाल करें और एक्सपोर्ट बढ़ाने के साथ भारत में उत्पादन भी मजबूत करें.


  • 4 मई को सरकार ने FTA की प्रगति की समीक्षा की. इसके बाद 7 मई को एक और बैठक हुई, जिसमें भारतीय कृषि और मछली उत्पादों को दुनियाभर के बाजारों में मंजूरी दिलाने के लिए रोडमैप तैयार किया गया. सरकार चाहती है कि भारतीय कृषि और फूड प्रोडक्ट्स ज्यादा से ज्यादा देशों तक पहुंचें.

    कॉमर्स मिनिस्ट्री ने विदेशों में मौजूद भारतीय मिशनों को भी इस अभियान में शामिल किया है. उनका काम दूसरे देशों में FTA के बारे में जागरूकता बढ़ाना, नए बिजनेस मौके तलाशना और व्यापार में आने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को जल्दी दूर कराना होगा. इसके अलावा अलग-अलग मंत्रालयों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि उत्पादन पर्याप्त हो और भारतीय उत्पाद ग्लोबल स्टैंडर्ड्स पर खरे उतरें.

    सरकार आने वाले वर्षों में भारत के वस्तु और सेवा निर्यात को 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना चाहती है. इसमें 1 ट्रिलियन डॉलर सामान और 1 ट्रिलियन डॉलर सेवाओं के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है. वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद 2025-26 में भारत का कुल वस्तु और सेवा निर्यात 4.6% बढ़कर रिकॉर्ड 863.11 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया.

    CRF के प्रेसिडेंट और WTO के पूर्व डायरेक्टर शिशिर प्रियदर्शी का कहना है कि भारतीय कंपनियों को FTA को सिर्फ टैक्स कम करने वाले समझौते के तौर पर नहीं देखना चाहिए. उनके मुताबिक, ये समझौते भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत जगह दिलाने, नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने और हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स के जरिए दुनिया में प्रतिस्पर्धा मजबूत करने का बड़ा मौका देते हैं.

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