नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष (Iran-US Conflict) के बीच भारत में तेल संकट और फ्यूल राशनिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री (Narendra Modi) द्वारा ईंधन बचाने की अपील और वर्क फ्रॉम होम जैसी सलाहों के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा कि क्या देश में पेट्रोल-डीजल पर कोटा लागू हो सकता है। हालांकि सरकार ने इस आशंका को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
उन्होंने साफ कहा कि सरकार लगातार अतिरिक्त ऊर्जा कार्गो की व्यवस्था कर रही है और मौजूदा सप्लायर्स से आयात भी बढ़ाया गया है। उनका कहना था कि जनता को किसी तरह की घबराहट में आने की जरूरत नहीं है।
भारत के पास कितना ईंधन भंडार?
सरकार के मुताबिक, मौजूदा हालात में भारत के पास लगभग 60 दिन का पेट्रोल-डीजल भंडार उपलब्ध है। वहीं एलपीजी का स्टॉक करीब 45 दिनों के लिए पर्याप्त बताया गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को पिछले दो वर्षों से स्थिर रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, कीमतों को नियंत्रित रखने की वजह से तेल कंपनियों को रोजाना 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये तक का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
क्या होती है फ्यूल राशनिंग?
फ्यूल राशनिंग का मतलब होता है कि सरकार पेट्रोल, डीजल या गैस की खरीद पर सीमा तय कर दे। यानी एक व्यक्ति, वाहन या परिवार को तय मात्रा में ही ईंधन मिल सके।
ऐसा कदम आमतौर पर तब उठाया जाता है, जब किसी देश में तेल की भारी कमी हो जाए या सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो। इसका उद्देश्य ईंधन की बर्बादी रोकना और सभी तक जरूरी मात्रा में आपूर्ति सुनिश्चित करना होता है।
कई देशों में लागू हैं सख्त नियम
दुनिया के कई देशों में पहले से ही फ्यूल नियंत्रण के उपाय लागू हैं। Sri Lanka में नेशनल फ्यूल पास सिस्टम लागू है, जहां वाहनों के लिए साप्ताहिक सीमा तय की गई है।
Pakistan में भी प्रति वाहन सीमित मात्रा में ईंधन देने के नियम लागू किए गए हैं। वहीं Germany और France के कुछ इलाकों में भी खरीद सीमा और क्यूआर कोड आधारित सिस्टम लागू किए गए हैं।
इसके अलावा Myanmar, Slovakia और Cambodia जैसे देशों में भी ईंधन नियंत्रण के अलग-अलग मॉडल अपनाए गए हैं।
फिलहाल भारत में कोटा लागू होने के संकेत नहीं
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति स्थिति नियंत्रण में है और फिलहाल फ्यूल राशनिंग जैसे कदम की जरूरत नहीं है। हालांकि, सरकार लगातार वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए है और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक इंतजाम भी कर रही है।
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