नई दिल्ली। केरल विधानसभा चुनाव (Kerala Assembly Elections) में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बावजूद कांग्रेस अब तक मुख्यमंत्री (CM) के नाम पर अंतिम फैसला नहीं कर पाई है। पिछले एक सप्ताह से जारी बैठकों, लॉबिंग और अंदरूनी खींचतान (Intrauterine stretching) के बीच अब उम्मीद जताई जा रही है कि बुधवार को मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहा सस्पेंस खत्म हो सकता है।
दिल्ली में हाईकमान की मैराथन बैठकें
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाअर्जुन खरगे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी के बीच नए मुख्यमंत्री को लेकर अंतिम दौर की चर्चा पूरी हो चुकी है।
पार्टी नेतृत्व ने केरल के कई वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली तलब किया था, ताकि आम सहमति बनाई जा सके। नेताओं के साथ लगातार बैठकों के बाद अब संकेत मिल रहे हैं कि आज मुख्यमंत्री के नाम का औपचारिक ऐलान किया जा सकता है।
जीत के बाद खुलकर सामने आई गुटबाजी
कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 103 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की है। लेकिन जीत के तुरंत बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी।
पार्टी के अंदर पिछले कई दिनों से बैकडोर बैठकों, समर्थकों के विरोध प्रदर्शन और सोशल मीडिया कैंपेन का दौर चल रहा है। कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि इस खींचतान ने ऐतिहासिक जीत की चमक कुछ हद तक फीकी कर दी है।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में तीन बड़े चेहरे
फिलहाल मुख्यमंत्री पद की रेस में तीन वरिष्ठ नेता सबसे आगे माने जा रहे हैं-
सूत्रों के अनुसार, तीनों गुट अपने-अपने समर्थन का दावा कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि वेणुगोपाल गुट सबसे अधिक विधायकों का समर्थन होने का दावा कर रहा है, जबकि वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला भी मजबूत दावेदारी बनाए हुए हैं।
राहुल गांधी ने मांगा जवाब
मुख्यमंत्री चयन में हो रही देरी और पार्टी के भीतर विरोध प्रदर्शनों को लेकर राहुल गांधी ने नाराजगी जताई है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने नेताओं से स्पष्टीकरण भी मांगा है।
कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि अंतिम फैसला केवल विधायकों की संख्या के आधार पर नहीं होगा, बल्कि संगठनात्मक ताकत, जनता की भावना और गठबंधन सहयोगियों की राय को भी महत्व दिया जाएगा।
भाजपा ने तेजी से पूरी की प्रक्रिया
जहां कांग्रेस अभी तक मुख्यमंत्री तय नहीं कर पाई है, वहीं भाजपा ने अपने शासित राज्यों में तेजी से सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी कर ली है।
बंगाल में भाजपा नेता शुभेन्दु अधिकारी ने 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली थी। वहीं असम में हिमंत विश्व शर्मादूसरी बार मुख्यमंत्री बन चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल में मुख्यमंत्री चयन में हो रही देरी कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि लंबे समय तक अनिश्चितता रहने से कार्यकर्ताओं और वोटरों के बीच गलत संदेश जाने का खतरा बढ़ जाता है।
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