
3 नंबर में अब बाबा के बाद कौन?
पानी वाले बाबा का स्वभाव ऐसा था कि उनके सामने बोलने की किसी में हिम्मत नहीं होती थी, फिर टिकट मांगना तो दूर की बात है। तीन नंबर में केवल जोशी परिवार की ही चली और पिछली बार पिंटू जोशी भी काफी जद्दोजहद के बाद टिकट ले आए, लेकिन उन्हें गोलू शुक्ला के सामने पराजय का सामना करना पड़ा। अब अश्विन बाबा के जाने के बाद एक बार फिर तीन नंबर की ओर कई कांग्रेसी नेता आंखें गढ़ाकर बैठक गए हैं, ताकि दो साल बाद हो वाले विधानसभा चुनाव में टिकट मिल जाए। पिंटू जोशी तो हारे हुए प्रत्याशी है इसलिए उनके नाम से अलग हटकर अब यहां से कोई नया चेहरा प्रत्याशी के रूप में उबरा जा सकता है कोई बड़ी बात नहीं की एक-दो महीने में ही यहां कुछ नेता अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए नजर आए। वैसे विनय बाकलीवाल और अरविन्द बागड़ी जैसे नेताओं की निगाहें तीन नंबर विधानसभा पर हैं और हो सकता है कि इनमें से ही किसी एक को अगला चांस मिल जाए।
चाय से ज्यादा केतली हो रही गरम
एक विधायक, जिनकी विधानसभा में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र दोनों लगता है के साथ रहने वाले एक समर्थक की चर्चाएं क्षेत्र में जोरों पर हैं। दरअसल चाय से ज्यादा केतली गरम वाली कहावत यहां दिख रही है। सरकारी कामकाज में दखल और दबाव रखने वाले नेताजी के समर्थक शहरी क्षेत्र के एक वार्ड में स्थानीय पार्षद से मिलकर बड़ी बिल्डिंगों में नोटिस का खेल जमा रहे हैं। बाकी काम पार्षद और उनके समर्थक कर डालते हैं। अब बेचारे अधिकारी भी क्या करें, उनकी बात नहीं माने तो किसी न किसी कारण से विधायक से चुगली कर दी जाती है हमेशा शांत रहने वाले विधायक भी अपना आपा खो बैठते हैं।
राहुल धाकरे थे प्रदर्शन में शामिल
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी पर टिप्पणी करने के मामले में कांग्रेस से बाहर किए गए ब्लाक अध्यक्ष राहुल धाकरे को पानी के लिए हुए प्रदर्शन में शहर कांग्रेस ने झोन नंबर 8 का समन्वयक बनाकर जवाबदारी सौंपी थी। हालांकि उन्हें पहले ही कांग्रेस से निकाल दिया गया था, लेकिन उनका नाम समन्वयक के तौर पर सूची में आना कई सवाल भी खड़े कर रहा है। जिसे प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने हटाया, उसे स्थानीय नेताओं का साथ मिला। हालांकि राहुल को कांग्रेस नेताओं के यहां देखा जा रहा है, ताकि उनकी वापसी हो सके, लेकिन भोपाल में माफी के बगैर उनकी मंशा अधूरी रह सकती है।
मालवा उत्सव में पलीता लगाते पार्किंग वाले
शंकर लालवानी ने जिस उद्देश्य को लेकर मालवा उत्सव शुरू किया था, उनके समर्थकों ने ही उसे अब अपने व्यवसाय का जरिया बना लिया है। कुछ समर्थक तो ज्यादा फायदे के चक्कर में उत्सव एरिया का चप्पा-चप्पा बेच डालते हैं, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं रहता है। इस बार ऐसा ही कुछ हुआ दशहरा मैदान में, जहां जगह कम थी, लेेकिन दुकानें इतनी लगा दी गई कि लोगों का पैदल चलना मुश्किल हो गया। बाकी रही-सही कसर पार्किंग वाले पूरी कर दी और ऐसे लोगों के हाथों में कमान दे दी, जिन्होंने यहां आए लोगों को अपनी दादागीरी के बल पर जिधर चाहे उधर भेज दिया। भीड़ में तो दोपहिया वाहन के 20 और कार के 50 रुपए तक वसूल किए गए। अब बेचारे लोग क्या करते, अगर इनसे विवाद करते तो मेले में घूमने-फिरने का मूड नहीं बन पाता।
एक कदम आगे निकल गए विधायक
प्रधानमंत्री मोदी की अपील का मैदानी स्तर पर कम, बल्कि सोशल मीडिया पर ज्यादा असर दिख रहा है। एमआईसी मेम्बरों ने ईवी वाहन से अपनी रील बनवाई और बाद में वे अपनी एसी कार में दिखाई दिए। ऐसा ही कुछ एक विधायक महोदय ने भी किया। उन्होंने न केवल रीन बनवाई, बल्कि प_ों से सोशल मीडिया पर वायरल भी करवा दिया, जिसमें वे परिवार के साथ ई-रिक्शा में जा रहे हैं। उनकी पत्नी और बेटी भी साथ थे। वैसे यह भी उनकी रील ही साबित हुई, क्योंकि उनकी विधानसभा ही इतनी बड़ी है कि ई-रिक्शा से घूमना उनके लिए परेशानी का सबब बन सकता है।
छाछ और ठंडा पानी कहां गया?
गर्मी की शुरुआत में भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने लोगों को छाछ और ठंडा पानी पिलाने को लेकर खूब प्रचार-प्रसार किया, लेकिन अब जब असली गर्मी पड़ रही है तो नेता गायब है। राजबाड़ा से ही दोनों ने शुरुआत की थी कि लोगों को ठंडा पानी पिलाएंगे और छांछ भी देंगे, ताकि गर्मी में उन्हें राहत मिल सके। हालांकि दोनों ही पार्टी के नेता कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे ही एक नेताजी बाजार में मिल गए तो उनसे छाछ पिलाने को लेकर बात की तो उनका कहना था कि भैया मेरा काम तो शुरू करवाना था। इसमें थोड़ा खर्चा ज्यादा आ रहा था। खैर नेताजी को क्या, उन्होंने जो कुछ किया अपने आका को खुश करने के लिए किया।
आए ऑटो रिक्शा से, गए कार से
भाजपा के शहर प्रभारी राजेश सोलंकी ग्वालियर से ट्रेन से इंदौर पहुंचे और फिर भाजपा कार्यालय पर ऑटो रिक्शा से पहुंच गए। संदेश देना था कि मोदीजी का कहा मान रहे हैं, लेकिन ये बात उस समय हवा हो गई, जब वे नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के साथ महाकाल दर्शन को एसी कार में बैठकर पहुंच गए। जाहिर है एक गाड़ी तो थी नहीं, क्योंकि सुमित के साथ वे थे, जो दिन-रात उनके आगे-पीछे रहते हैं और ऐसे मौके नहीं छोड़ते।
बढ़ती गर्मी का असर शराब के ठीयों पर नजर आने लगा है। शहर की अंग्रेजी वाइन शॉप की दुकानों पर बीयर नहीं मिल रही है। इसको लेकर ठेकेदार अधिकारियों से मिले, लेकिन अधिकारी भी क्या कर सकते हैं। बताया जाता है कि एक बड़ी डिस्टलरी बंद होने का असर बीयर की सप्लाई पर पड़ा है, जो इस सीजन में तो सुधरने वाला नहीं। -संजीव मालवीय
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