
- गाडिय़ों में मनमाने इंटीरियर, मॉडिफिकेशन, ओवर हीटिंग और शॉर्ट सर्किट से हो रहे हादसे
उज्जैन। स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। इंदौर से शिवपुरी जा रही बस में चार दिन पहले शाजापुर के पास उज्जैन जिले के तराना थाना क्षेत्र में आग लग गई थी। इसमें एक बच्चे की मौत हो गई थी।
वाहनों में लगने वाली आग के संबंध में जानकारों के अनुसार बसों में मनमाने तरीके से इंटीरियर, मॉडिफिकेशन करने और ओवर हीटिंग व शॉर्ट सर्किट से बसों में हादसे हो रहे हैं। वहीं बसों के फिटनेस जाँचने के लिए कोई शासकीय सिस्टम नहीं है। निजी कंपनियाँ ही बसों के फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर रही हैं। जानकारी अनुसार शहर से रोजाना 150 से ज्यादा स्लीपर बसें दिल्ली, मुंबई (महाराष्ट्र), गुजरात, राजस्थान और अन्य प्रांतों के लिए चलती हैं। आग की घटना में इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट सबसे सामान्य कारण माना जाता है। एसी यूनिट, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, एलइडी लाइटिंग और अतिरिक्त वायरिंग पर ज्यादा लोड पडऩा। लोकल या घटिया क्वालिटी की वायरिंग, तारों का घिस जाना व ओवरहीट भी एक वजह हो सकती है। ऐसी बसों में कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगातार चलते रहते हैं, इससे वायरिंग पर दबाव बनता है। इसी प्रकार इंजन या बैटरी में ओवरहीटिंग से भी आग लगती है। कंप्रेसर जाम होना, गैस लीकेज, जेनरेटर या इन्वर्टर सिस्टम में खराबी से भी हादसे होते हैं। स्लीपर कोच में इस्तेमाल होने वाले फोम मैट्रेस, पर्दे, प्लास्टिक पैनल, सीट कुशन, आग पकडऩे के बाद जहरीला धुआं तेजी से फैलाते हैं। इसमें दम घुटने व सांस न लेने से भी मौतें हुई हैं। कई निजी बसों में इमरजेंसी विंडो जाम होती है। अग्निशमन यंत्र काम नहीं करते, एक ही एंट्री-एग्जिट होता है, स्लीपर डिजाइन में ऊपरी बर्थ से निकलना और मुश्किल होता है।