
- खाद्य विभाग की टीम जाँच नहीं करती-शहर में कई क्विंटल बर्फ प्रतिदिन-बेचा जाता है
उज्जैन। शहर में प्रतिदिन 150 क्विंटल से अधिक बर्फ की खपत हो रही है, लेकिन लोग जो बर्फ खा रहे है वह कितना शुद्ध है इसकी जाँच एक बार भी नहीं हुई है।
उल्लेखनीय है कि जिला खाद्य एवं औषधीय प्रशासन विभाग की लापरवाही के कारण उज्जैन में बर्फ का कारोबार बेरोकटोक चल रहा है। शहरी समेत आसपास के क्षेत्रों में बर्फ की करीब 5 से ज्यादा फैक्ट्रियाँ चल रही हैं। इनके पास लाइसेंस है या नहीं, यह सब कैसा बर्फ बना रही हैं और यह बर्फ खाने के लिए सुरक्षित है या नहीं। खाद्य विभाग को इसकी जानकारी तक नहीं है। उल्लेखनीय है कि शहर में जूस सेंटरों में धड़ल्ले से अमानक बर्फ बेची जा रही है। इसके अलावा शादी और पार्टियों में भी इसका जमकर उपयोग हो रहा है। बर्फ फैक्ट्रियों से मार्केट में आने वाली सिल्लियाँ का उपयोग पेय पदार्थों में धड़ल्ले से किया जा रहा है लेकिन सिल्ली वाले बर्फ की जाँच कोई नहीं कर रहा। इसके सेवन से कै बीमारियाँ हो रही हैं। वहीं जल जनित बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग से लेकर फूड अधिकारी कितने गंभीर है। बता दें कि बर्फ फैक्ट्री संचालक स्थानीय निकाय से फैक्ट्री संचालन की स्वीकृति लेकर बर्फ बनाते हैं। जिलेभर में करीब कई फैक्ट्रियाँ चल रही है लेकिन खाद्य बर्फ बनाने का लाइसेंस किस किस के पास है इसका सही आंकड़ा भी विभाग के पास नहीं हैं।
पीएचई की लैबोरेटरी में भी जांच नहीं..
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस पानी से खाद्य बर्फ बनाई जानी है। उस फैक्ट्री के मालिक को पानी की जांच पीएचई लैबरेटरी में करानी होती है। उसके बाद खाद्य औषधि प्रशासन विभाग निरीक्षण करेगा। सभी व्यवस्था दुरुस्त होने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है।