
नई दिल्ली. देश के वैज्ञानिकों (Scientists) ने ऐसी नई तकनीक (technology) विकसित की है, जिससे भविष्य में बिना बैटरी (batteries) वाले सेंसर और पहनने वाले स्मार्ट गैजेट्स (smart gadgets) बनाए जा सकेंगे। मोहाली के इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने बेहद पतली और लचीली फिल्म तैयार की है, जो तापमान में हल्के बदलाव से भी बिजली बना सकती है। यह तकनीक हेल्थ मॉनिटरिंग, पर्यावरण मॉनिटरिंग और ऊर्जा बचाने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
यह शोध विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत काम करने वाले संस्थान में किया गया। शोध दल का नेतृत्व प्रोफेसर दीपांकर मंडल ने किया। उनके साथ वैज्ञानिक सुदीप नस्कर और अन्य शोधकर्ताओं ने मिलकर यह तकनीक विकसित की। प्रो. दीपांकर ने बताया कि हमारी टीम ने पीवीडीएफ नाम के एक खास लचीले पॉलिमर में बेहद कम मात्रा में नैनो गोल्ड यानी सोने के सूक्ष्म कण मिलाए। इसके बाद ऐसी अल्ट्रा-थिन फिल्म तैयार की गई, जिसकी मोटाई 100 नैनोमीटर से भी कम है। फिल्म की पाइरोइलेक्ट्रिक क्षमता काफी बढ़ गई। पाइरोइलेक्ट्रिक क्षमता का मतलब है कि कोई पदार्थ तापमान में बदलाव होने पर बिजली पैदा कर सके।
100 नैनोमीटर से कम मोटाई वाली बेहद पतली और लचीली फिल्म बनाई है वैज्ञानिकों ने
21 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान में बदलाव से भी यह फिल्म बिजली पैदा कर सकती है।
कमरे के तापमान पर भी कारगर
शोधकर्ताओं के अनुसार यह फिल्म सामान्य कमरे के तापमान पर भी काम करती है। केवल 294 से 301 केल्विन यानी करीब 21 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान में मामूली बदलाव से भी यह बिजली पैदा कर सकती है। यही वजह है कि इसे भविष्य की सेल्फ-पावर्ड यानी खुद ऊर्जा पैदा करने वाली तकनीक माना जा रहा है।
वियरेबल डिवाइस बनाने में इस्तेमाल संभव
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक का उपयोग भविष्य में स्मार्ट फोटोडिटेक्टर, कम ऊर्जा वाले सेंसर, पहनने योग्य स्वास्थ्य उपकरण और शरीर की गर्मी से चलने वाले इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बनाने में किया जा सकता है। इससे बैटरी पर निर्भरता कम होगी और छोटे, हल्के तथा ऊर्जा-कुशल उपकरण विकसित किए जा सकेंगे। यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स में प्रकाशित हुआ है।
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