चैन्नई। तमिलनाडु की राजनीति (Tamil Nadu Politics) में गुरुवार को उस समय दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (c. Joseph Victory) के मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion) समारोह के दौरान कांग्रेस विधायक एस. राजेश कुमार ने शपथ लेने के बाद राहुल गांधी और राजीव गांधी के समर्थन में नारे लगा दिए। इस पर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने तुरंत उन्हें टोका और कहा कि यह शपथ प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है।
लोक भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री विजय ने अपने 11 दिन पुराने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए दो कांग्रेस विधायकों समेत कुल 23 नेताओं को मंत्री बनाया। इसके साथ ही तमिलनाडु में लगभग छह दशक बाद कांग्रेस को सत्ता में प्रत्यक्ष भागीदारी मिली है।
टीवीके के विधायक श्रीनाथ, एस. कमाली, सी. विजयलक्ष्मी और आर.वी. रंजितकुमार ने सबसे पहले शपथ ली। इसके बाद कांग्रेस विधायक एस. राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन ने मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
समारोह के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उस वक्त हुई जब किल्लियूर से विधायक एस. राजेश कुमार ने शपथ पूरी करने के बाद अचानक कांग्रेस नेताओं के समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए। उन्होंने कामराज, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और राहुल गांधी के समर्थन में नारे लगाए।
राजेश कुमार ने कहा, “कामराज अमर रहें, भारत रत्न राजीव गांधी अमर रहें” और “जननेता राहुल गांधी जिंदाबाद।”
उनकी इस टिप्पणी पर राज्यपाल आर्लेकर ने तुरंत हस्तक्षेप किया और कहा, “यह शपथ का हिस्सा नहीं है।” राज्यपाल ने मुस्कुराते हुए उन्हें केवल निर्धारित शपथ-पत्र पढ़ने की सलाह दी। इसके बाद राजेश कुमार भी मुस्कुराते हुए मंच से नीचे उतर गए और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।
राजेश कुमार के बाद टीवीके विधायक ए. विजय तमिलन पार्थिबन ने भी मंत्री पद की शपथ लेने के बाद मंच से मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की प्रशंसा में नारे लगाए। इससे समारोह का माहौल और राजनीतिक रंग में रंगा नजर आया।
इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए कांग्रेस को तमिलनाडु की सत्ता में लगभग 60 वर्षों बाद हिस्सेदारी मिली है। राज्य में लंबे समय से द्रविड़ दलों DMK और AIADMK का दबदबा रहा है और दोनों दलों ने गठबंधन सहयोगियों को आमतौर पर सरकार में शामिल नहीं किया।
तमिलनाडु में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री एम. भक्तवत्सलम थे, जिन्होंने 1963 से 1967 तक शासन किया था। उस समय राज्य को मद्रास कहा जाता था।
राज्य में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार 1967 में द्रमुक संस्थापक सी.एन. अन्नादुरई के नेतृत्व में बनी थी। उन्होंने कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर नया राजनीतिक दौर शुरू किया था।
बुधवार को टीवीके नेता और लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुन ने कांग्रेस, वीसीके और आईयूएमएल को सरकार में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री विजय सहयोगी दलों को सरकार में प्रतिनिधित्व देना चाहते हैं।
तमिलनाडु विधानसभा में कांग्रेस के पांच विधायक हैं। चुनाव में टीवीके बहुमत से कुछ सीटें पीछे रह गई थी, जिसके बाद कांग्रेस का समर्थन सरकार गठन के लिए अहम बन गया। कांग्रेस ने सबसे पहले टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया था और इसके साथ ही DMK से दो दशक पुराना गठबंधन भी खत्म कर दिया था।
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