कोच्चि। सऊदी अरब (Saudi Arabia) की जेल में लगभग दो दशक तक मौत की सजा का इंतजार कर रहे केरल के अब्दुल रहीम (Abdul Rahim) की जिंदगी आखिरकार नई उम्मीद की ओर बढ़ गई है। पीड़ित परिवार द्वारा 34 करोड़ रुपये की ‘ब्लड मनी’ स्वीकार किए जाने के बाद उनकी फांसी की सजा टल गई है और अब उनकी रिहाई की अंतिम कानूनी प्रक्रिया चल रही है। लंबे संघर्ष, कानूनी लड़ाई और दुनियाभर से मिले जनसमर्थन ने रहीम को मौत के मुहाने से वापस खींच लिया।
केरल के कोझिकोड जिले के रहने वाले अब्दुल रहीम छह भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने के लिए वह केरल में ऑटो रिक्शा और स्कूल बस चलाते थे। बेहतर कमाई की उम्मीद में वह 28 नवंबर 2006 को सऊदी अरब के रियाद पहुंचे, जहां उन्हें ड्राइवर की नौकरी मिली।
रहीम को अपने मालिक के 17 वर्षीय लकवाग्रस्त बेटे की देखभाल की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। किशोर पूरी तरह ब्रीदिंग सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर था। 24 दिसंबर 2006 को कार यात्रा के दौरान कथित रूप से गलती से उसका लाइफ सपोर्ट सिस्टम हट गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद सऊदी पहुंचने के केवल 28 दिन के भीतर रहीम को गिरफ्तार कर लिया गया।
साल 2011 में सऊदी अदालत ने रहीम को मौत की सजा सुनाई थी। बाद में ऊपरी अदालतों ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद उनका परिवार लगातार अनिश्चितता और डर के माहौल में जीता रहा।
कई वर्षों तक कोई समाधान नजर नहीं आया, लेकिन 2022 में मामला नया मोड़ लेता दिखा, जब पीड़ित परिवार मध्यस्थता के लिए तैयार हुआ। बाद में उन्होंने मुआवजा स्वीकार करने पर सहमति जताई। रहीम को बचाने के लिए 16 अप्रैल 2024 तक रकम जमा करने की समयसीमा तय की गई।
इतनी बड़ी राशि जुटाना परिवार के लिए असंभव था। इसके बाद मार्च 2024 में कोझिकोड के फेरोक क्षेत्र के लोगों ने ‘सेव अब्दुल रहीम’ अभियान शुरू किया। सोशल मीडिया के जरिए यह मुहिम तेजी से दुनिया भर में फैल गई। प्रवासी भारतीयों, मजदूरों, सामाजिक संगठनों और कई प्रमुख हस्तियों ने आर्थिक मदद दी।
मशहूर कारोबारी बॉबी चेम्मनूर ने भी जागरूकता अभियान चलाया और फंड जुटाने के लिए राज्यभर में यात्रा की। सामूहिक प्रयासों के चलते कुछ ही हफ्तों में करीब 34 करोड़ रुपये इकट्ठा हो गए।
रहीम के परिवार के लिए ये 20 साल बेहद कठिन रहे। उनके भाई नजीर के मुताबिक, पूरा परिवार हर दिन डर और उम्मीद के बीच जी रहा था। उन्होंने बताया कि रहीम की गिरफ्तारी के छह महीने बाद ही उनके पिता मोहम्मदकुट्टी का निधन हो गया था।
उनकी मां फातिमा इतने वर्षों में केवल एक बार अपने बेटे से मिल सकीं। नवंबर 2024 में माफी मिलने के बाद उन्हें जेल में मुलाकात की अनुमति मिली थी। परिवार के लिए वीडियो कॉल ही बेटे से जुड़े रहने का एकमात्र सहारा था।
मुआवजे की रकम मिलने के बाद रहीम की फांसी की सजा रद्द कर दी गई, लेकिन सऊदी प्रशासन ने उन्हें 20 साल की जेल अवधि पूरी करने का आदेश दिया था। अरबी कैलेंडर के अनुसार, उनकी सजा 20 मई 2026 को पूरी हो चुकी है।
अभियान से जुड़े मजीद अम्बलक्कंडी के अनुसार, भारतीय दूतावास के अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता सऊदी प्रशासन के साथ मिलकर रिहाई की अंतिम कानूनी प्रक्रिया पूरी कराने में जुटे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि औपचारिकताएं पूरी होते ही अब्दुल रहीम जल्द अपने घर लौट सकेंगे।
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