नई दिल्ली। अफ्रीकी देशों (African countries) में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस (Ebola Virus) के खतरे को देखते हुए भारत और अफ्रीकी संघ ने नई दिल्ली में प्रस्तावित भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन को फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह सम्मेलन 28 से 31 मई के बीच आयोजित होना था। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि नई तारीखों का फैसला दोनों पक्षों के आपसी परामर्श के बाद किया जाएगा।
हालांकि सरकार की ओर से सम्मेलन टालने का कोई औपचारिक कारण नहीं बताया गया, लेकिन माना जा रहा है कि अफ्रीकी देशों, खासकर कांगो में तेजी से फैल रहे इबोला संक्रमण को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
पूर्वी कांगो में इबोला संक्रमण लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। राहत एजेंसियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने चेतावनी दी है कि हालात और बिगड़ सकते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अतिरिक्त मेडिकल सहायता, दवाओं और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती बढ़ाने की मांग की है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, जिन इलाकों में संक्रमण फैला है वहां पहले से ही हिंसा, विस्थापन और मानवीय संकट जैसी समस्याएं मौजूद हैं। सशस्त्र समूहों की गतिविधियों के कारण राहत कार्यों में भी दिक्कत आ रही है।
अलीमा नामक सहायता संगठन के बुनिया क्षेत्र समन्वयक हामा अमाडो ने कहा कि स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है और संक्रमण लगातार नए इलाकों में फैल रहा है। उन्होंने कहा कि अभी यह दावा नहीं किया जा सकता कि हालात नियंत्रण में हैं।
स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, इस बार फैला इबोला वायरस बुंडीबुग्यो स्ट्रेन का है, जिसके लिए फिलहाल कोई प्रभावी टीका या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि संक्रमण का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार अब तक करीब 139 से 148 लोगों की मौत की आशंका जताई गई है, जबकि लगभग 600 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं।
इबोला प्रभावित रवाम्पारा क्षेत्र में हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि स्थानीय लोगों ने एक अस्पताल में आग लगा दी। बताया गया कि शवों के अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच विवाद हुआ था।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं, लेकिन कई बार ये स्थानीय परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों से टकरा जाते हैं। इससे लोगों में डर और नाराजगी बढ़ रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबोला के बढ़ते मामलों को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। भारत समेत कई देशों ने अफ्रीका से आने वाले यात्रियों की निगरानी बढ़ा दी है और स्वास्थ्य एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved