नई दिल्ली। दुनिया भर में महंगाई और खाद्य संकट को लेकर चिंता तेजी से बढ़ती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization (FAO) ने चेतावनी दी है कि अगले 6 से 12 महीने वैश्विक अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील साबित हो सकते हैं। संगठन का कहना है कि युद्ध, ऊर्जा संकट और बिगड़ते मौसम का असर सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच सकता है।
एफएओ के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हो रही बाधाओं से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है, जिससे खाद्य पदार्थों और जरूरी वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़ने की आशंका है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा संकट और परिवहन लागत बढ़ने का सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है। ईंधन महंगा होने से खाद उत्पादन, सिंचाई और कृषि परिवहन की लागत भी बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस संभावित खाद्य संकट के पीछे ‘अल नीनो’ जलवायु प्रभाव भी बड़ी वजह बन सकता है। El Niño के कारण दुनिया के कई हिस्सों में सूखा, अनियमित बारिश और चरम मौसम की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
अमेरिकी मौसम विज्ञान एजेंसियों के अनुमानों के अनुसार मई से जुलाई 2026 के बीच अल नीनो सक्रिय होने की संभावना 82 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई कृषि प्रधान देशों में फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।
एफएओ की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 में वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक लगातार तीसरे महीने बढ़ा है। सबसे ज्यादा तेजी खाद्य तेलों की कीमतों में दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार खाद्य तेल सूचकांक में 5.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह जुलाई 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इसके पीछे ऊर्जा कीमतों में उछाल और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को मुख्य कारण माना जा रहा है।
एफएओ ने चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो कमजोर और विकासशील देशों में खाद्य संकट गंभीर रूप ले सकता है। कई देशों में लोगों को महंगे राशन और खाद्य कमी का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध और मौसम से जुड़ी समस्याएं लंबे समय तक जारी रहीं, तो वैश्विक महंगाई पर काबू पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा और आने वाले महीनों में आम लोगों की जेब पर भारी असर पड़ सकता है।
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