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ये पॉलिटिक्स है प्यारे

May 25, 2026

  • बाबा तो फिर बाबा ही है

इंदौर में भाजपा की राजनीति में बाबा के नाम से जाने जाने वाले महेन्द्र हार्डिया है तो भोले-भंडारी। कब क्या कर बैठे, कोई नहीं जानता। बाबा अभी चर्चा में हैं और एक और चर्चा उनके साथ जुड़ गई। एक ओर शहर में जहां आम लोगों के साथ अपराधियों की तरह व्यवहार करके हेलमेट के चालान बनाए जा रहे हैं तो बाबा बिंदास बिना हेलमेट के एक वीडियो में बुलेट चलाते नजर आए। आखिर बाबा तो बाबा ठहरे…

कांग्रेस के पूर्व पार्षद की दादागीरी
शहर में जलसंकट के चलते जनप्रतिनिधियों पर दबाव है कि वे लोगों को पानी दें। जब वार्ड क्रमांक 47 की बारी आई तो भाजपा पार्षदों को मालूम पड़ा कि यहां कई जगह से वॉल्व खोले गए हैं, जिसके कारण नियमित होने वाली जल सप्लाय में परेशानी आ रही है। यही नहीं भाजपा के पार्षद उस समय चौंक गए, जब मालूम पड़ा कि इसी क्षेत्र में बरसों पहले रहे कांग्रेस के एक पार्षद ने मनमर्जी से मेन लाइन में वॉल्व लगवा लिया और रात को 12 बजे वे अनाधिकृत रूप से वॉल्व खोलते हैं और अपने मोहल्ले वालों को पानी देते हैं। हालांकि अभी तक पार्षदों में इतनी हिम्मत नहीं हुई कि वो वॉल्व बंद करा सकें।


  • होर्डिग लगाने वालों पर 5 हजार रुपए जुर्माना
    जब से चिंटू चौकसे शहर कांग्रेस अध्यक्ष बने हैं, तब से वे कुछ न कुछ नया करते आ रहे हैं। चिंटू चौकसे ने गांधी भवन के जीर्णोद्धार का जिम्मा भी उठाया है और साथ ही कांग्रेसियों में होर्डिंगवार रोकने के लिए जुर्माना भी रख दिया है। चौकसे ने उन कांग्रेसियों को साफ शब्दों में कह दिया है कि अपना नाम चमकाने के लिए गांधी भवन पर किसी प्रकार का होर्डिंग लगाना मना है। उन्होंने होर्डिंग लगाने वाले नेता पर 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का भी फरमान सुना दिया, जो पार्टी फंड में जमा किया जाएगा। अब देखते है चिंटू की चेतावनी का कितना असर कांग्रेसियों पर होता है या फिर…

    कांग्रेसियों में आ रही नई जान
    भागीरथपुरा कांड के बाद शहर में व्याप्त जलसंकट ने कांग्रेस में नई जान फूंक दी है। हर जगह हो रहे धरना-आंदोलनों में कांग्रेस के नेता नगर निगम पर हमलावर होने का मौका नहीं छोड़ रहे हैं। शहर में तो लगभग हर वार्ड में आंदोलन हो चुके हंै या हो रहे है, वहीं शहर कांग्रेस कल राजबाड़ा पर एक बड़ा आंदोलन पानी को लेकर करने जा रही है। दो दिन पहले ग्रामीण कांग्रेस ने भी एक बड़ा आंदोलन राऊ में किया और आंदोलन इतना आक्रामक हो गया कि कांग्रेसियों का आक्रोश फूट पड़ा। सीएमओ ने पुलिस बुलवा ली। पुलिस जब आंदोलनकारियों को तितर-बितर करने लगी तो अध्यक्ष विपिन वानखेड़े सामने आ गए। उन्हें भी ताव आ गया और वे पुलिस अधिकारियों से कहने लगे कि पानी मांगना अगर गुनाह है तो हमको गोली मार दो, लेकिन हम यहां से हटेेंगे नहीं।

    मोदी की नसीहत का असर नहीं पड़ा
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मितव्ययता बरतने की बात अपनी पाटी के पदाधिकारियों और सरकारों से की है। चूंकि सरकार में बैठे लेागों पर सबकी नतर रहती है, इसलिए वहां तो खर्चे कम कर दिए गए हैं, लेकिन निचले स्तर पर मोदी की नसीहत का कोई असर नहीं पड़ा है। आज भी भाजपा कार्यालय पर नई चमचमाती कम एवरेज देने वाली कारों से नेता उतरते हैं और ऐसे कलफबंद कपड़े पहनते हैं, जिस पर रोज खर्चा होता है। हालांकि अपील की कोई मॉनिटरिंग होने का फायदा नेता उठा रहे हैं। इंदौर के दोनों मंत्रियों ने भी अपने काफिले में कटौती कर दी है, लेकिन छोटे नेता है कि दो-चार कारों के साथ न चलें तो फिर उन्हें नेता कौन कहे?

    अजयसिंह पर टिप्पणी कर फंसे कांग्रेसी
    पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह के इंदौर दौरे को लेकर कांग्रेस के हितेश एस वर्मा ने उंगली उठा दी और अपने सोशल मीडिया पर लिख दिया कि वे सोए हुए कांग्रेसियों को जगाने के लिए निकले थे और उनके घर गए भी। इसको लेकर कांग्रेस के उन नेताओं को गुस्सा आ गया, जो कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। इनमें एक थे प्रदेश कांग्रेस के सचिव रह चुके राकेश यादव। उन्हें न केवल गुस्सा आया, बल्कि उन्होंने राहुल गांधी और प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी को पत्र लिखकर मांग कर डाली कि ऐसे लोगों की कांग्रेस में जरूरत नहीं है, जो कांग्रेस के बड़े नेताओं पर ही उंगली उठाते हैं।

    बड़े पटेल साब ने कर लिया अजयसिंह को केप्चर
    अजयसिंह का इंदौर ग्रामीण में दौरा था, लेकिन उनके आसपास राधेश्याम पटेल थे। शुरू से लेकर आखिरी तक उन्होंने अजयसिंह को नहीं छोड़ा। इससे साबित हो रहा है कि बड़े पटेल साब की निगाह देपालपुर पर है और वे वहां से कोई मौका नहीं छोडऩा चाहते। इधर छोटे पटेल साब की निगाह पांच नंबर पर भी है। देखते हैं दोनों पटेल में से कौन बाजी मारता है और 2028 के मैदान में नजर आता है।

    भाजपा नेता की जमीन पर शहर की एक चर्चित शराब दुकान आखिरकार खुल ही गई। जिन्होंने कलेक्टर से दुकान न खुलने को लेकर बात की थी, वे भी पीछे रह गए और सब कुछ देखते रहे। यही नहीं जिस केन्द्रीय विभाग की जमीन पर दुकान खुली, उसके जवाबदार भी चुप्पी साधकर बैठे हैं। सबका मकसद हल हो गया है और दुकान के साथ खुले मैदान में अहाता भी चालू हो गया है। -संजीव मालवीय

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