
पटवारी के आरोपों पर स्थानीय नेताओं का मौन क्यों?
आश्चर्य की बात रही कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर जमीन खरीदी संबंधी मामले में कई आरोप लगाए, लेकिन इंदौर के बड़े-बड़े नेताओं ने चूं तक नहीं की। जो नेता मुख्यमंत्री के अराइवल और डिपार्चर पर एयरपोर्ट पर दुपट्टा लेकर पहुंच जाते हैं, उन्होंने भी मीडिया से दूरी बनाई और मामला हाईलेवल का होने का बहाना बनाया। जब संगठन ने मुंह खोला और मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में जाकर जीतू के बयान पर पलटवार करने का बोला तो मंत्री तुलसी सिलावट और प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे की जुबान खुली। हालांकि वे मीडिया के सामने ही बोले, बाकी मामलों में तो सभी ने अभी तक चुप्पी साध रखी है। उधर कांग्रेस इस मामले को हवा देने के मूड में हैं, क्योंकि जिस तरह से कांग्रेस ने भाजपा को कटघरे में लाने की कोशिश की है, उसमें यह जमीन मामला उसके लिए ऑक्सीजन भरा साबित होने वाला है।
कांग्रेस में कुछ तो गड़बड़ है
कांग्रेस भाजपा से परेशान तो थी ही, लेकिन अब वह अपनों से ही परेशान है, जो रोज सोशल मीडिया पर किसी न किसी नेता को लेकर बयानबाजी करते हंै और सार्वजनिक स्थान पर कांग्रेस के बारे में भला-बुरा कहते हैं। हालांकि इन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही जाती है, लेकिन प_ावाद में वह दबकर रह जाती है। तभी तो भोपाल से संगठन सचिव डॉ. संजय कामले ने सभी कांग्रेसियों को पत्र जारी कर सोशल मीडिया पर अनर्गल वार्तालाप रोकने की अपील करना पड़ी।
पहली बार राजा साब की तगड़ी घेराबंदी हुई
दिग्विजयसिंह ने सोचा नहीं था कि जिस पार्टी में उनका सिक्का चलता है, वहीं उनकी घेराबंदी हो जाएगी। मामला वीर भारत न्यास से जुड़ा था और दिग्गी ने इस मामले में जीतू पटवारी के आरोपों का एक तरह से खंडन किया था। बस फिर क्या था, दिग्गी से पुराना हिसाब-किताब बराबर किया जाने लगा। यहां तक कि उनका नाम लिए बगैर पार्टी में मौजूद स्लीपर सेल को बाहर करने की बात कह दी गई। इसमें सज्जनसिंह वर्मा और आरिफ मसूद की बयानबाजी तो सुखिर्या बनी हीं, लेकिन बाद में मालूम पड़ा कि वास्तव में यह ट्रस्ट सरकारी है और उसे जमीन देने में कोई घोटाला नहीं हुआ है। हालांकि दबी जुबान में अब कहा जा रहा है कि दिग्गी जैसे नेता कभी बिना आधार के बात नहीं करते।
अपने ही शहर में ढूंढे नहीं मिल रही कांग्रेस नेत्री
कांग्रेस भले ही लाख दावे करती हो कि उसका संगठन मजबूत हो रहा है, लेकिन महिला कांग्रेस का नेतृत्व करने वाली अभी तक मिली नहीं है। इस कारण शहर महिला कांग्रेस के अध्यक्ष पद खाली पड़े हुए हैं। वैसे खुद प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी इंदौर की हैं, लेकिन रीना को भी नया नाम निकालने में पसीने आ रहे हैं। कहने को तो कांग्रेस में महिला नेत्रियों की संख्या बहुत है, लेकिन अध्यक्ष किसे बनाया जाए, इसको लेकर कश्मकश है। पहले सोनिला मिमरोट अध्यक्ष हुआ करती थी, लेकिन जब से इनको हटाया गया है, तब से अभी तक न या चेहरा ढूंढा जा रहा है। हालांकि दावा किया जा रहा है कि जल्द से जल्द इस पद पर नियुक्ति कर दी जाएगी, लेकिन तब तक तो महिला कांग्रेस भगवान भरोसे ही रहेगी।
बार-बार क्यों बदली सम्मेलन की जगह
भाजपा का कल दो नंबर विधानसभा में हुआ कार्यकर्ता सम्मेलन तीसरी बार में स्थान चयनित होन के बाद हो पाया। हुआ यूं कि पहले नगर संगठन ने इस सम्मेलन को चार नंबर विधानसभा में आयोजित करने की रूपरेखा बनाई थी, लेकिन विधायक मालिनी गौड़ ने शहर से बाहर होने की बात कहकर अपने पाले से गेंद बाहर निकाल फेंकी। फिर तय हुआ कि यह सम्मेलन एक नंबर विधानसभा में बाबाश्री गार्डन में होगा, लेकिन वहां भी अड़चन आ गई और फिर स्थान बदल दिया गया। कल दो नंबर विधानसभा के अटल खेल परिसर में आखिरकार सम्मेलन हो ही गया।
वो कौन थे?
कल स्कीम नंबर 78 में हुए जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में जब अतिथियों को मंच पर बुलाया जाने लगा तो सामने बैठे कार्यकर्ताओं में से दो उम्रदराज कार्यकर्ता आकर मंच पर नेताओं के बाजू में बैठ गए। यह देख दूसरे नेता पता करने में जुट गए कि आखिर ये हैं कौन? मंच से इशारा हुआ कि इन्हें यहां से उतारो, लेकिन उसमें से एक कार्यकर्ता उतरने को तैयार नहीं थे। तभी एक युवा कार्यकर्ता ने उनका हाथ पकडक़र खींच दिया और मंच पर बैठे नेता भी देखते रहे।
संगठन की कार्यकारिणी में ये कैसी नियुक्ति?
भाजपा संगठन के बारे में कहा जाता है कि वह अपने संविधान के अनुसार चलने वाली पार्टी है, लेकिन इसमें संविधान को भी ताक में रख दिया गया है। मामला वीर सावरकर मंडल का है, जहां मंडल अध्यक्ष ने बीच में ही संगठन में एक नई नियुक्ति कर डाली। वह थी बंटू भोरूड़े को मंडल उपाध्यक्ष बनाने की। बाकायदा बंटी को नियुक्ति पत्र जारी किया गया, लेकिन नगर अध्यक्ष को इस बारे में जानकारी नहीं दी गई। नियुक्ति पत्र में नगर अध्यक्ष की बजाय क्षेत्रीय विधायक और पार्षद का नाम लिखा गया। यही नहीं दोनों जनप्रतिनिधि उक्त नए पदाधिकारी को नियुक्ति पत्र देने भी पहुंच गए, जबकि आमतौर पर ऐसा नहीं होता है।
भोपाल के तेजतर्रार भाजपा नेता रामेश्वर शर्मा के जन्मदिन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे कार्यकर्ताओं से जन्मदिन की शुभकामनाएं ले रहे हैं, लेकिन उनके द्वारा दिए गए फूल और बुके को इस तरह फेंक रहे थे कि कुछ कार्यकर्ताओं को ये नागवार गुजरा। -संजीव मालवीय
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved