कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। सिलीगुड़ी (Siliguri) में उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने ईद के एक कार्यक्रम में हिंदू धर्म को लेकर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
यह मामला एक अधिवक्ता की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि ममता बनर्जी ने पिछले वर्ष कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित ईद-उल-फितर कार्यक्रम के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसे सनातन धर्म का अपमान माना जा रहा है।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। इनमें आपराधिक धमकी, जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करने और समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
शिकायत अधिवक्ता रिंकी चटर्जी ने दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि मुस्लिम धार्मिक मंच से हिंदू धर्म को लेकर की गई टिप्पणी अस्वीकार्य है और इससे करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंची है।
विवाद की जड़ ममता बनर्जी का वह बयान बताया जा रहा है, जिसमें उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कथित तौर पर कहा था कि वह “उस गंदे धर्म को नहीं मानतीं, जिसे जुमला पार्टी ने गढ़ा है।” विपक्ष का आरोप है कि यह टिप्पणी सनातन धर्म के खिलाफ थी।
इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने ममता बनर्जी पर हिंदू विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया था। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख Amit Malviya ने उस समय सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया था कि क्या ममता बनर्जी के लिए सनातन धर्म “गंदा धर्म” है।
शिकायतकर्ता रिंकी चटर्जी का कहना है कि किसी धार्मिक मंच से दूसरे धर्म के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकती है। उन्होंने कहा कि यह केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि दुनिया भर के हिंदुओं का अपमान है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं ने हिंदू धर्म को लेकर विवादित बयान दिए हैं। इसमें ममता बनर्जी की टिप्पणी को सबसे गंभीर बताया गया है।
इस मामले के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर से भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। पार्टी की दार्जिलिंग इकाई के महासचिव और पेशे से वकील अत्री शर्मा ने व्यक्तिगत राय देते हुए कहा कि उस समय ममता बनर्जी द्वारा इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं था।
उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर भी कई लोग इस बयान से सहमत नहीं थे। अत्री शर्मा के मुताबिक, देश के हर नागरिक को अपनी धार्मिक भावनाओं के आहत होने पर शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है।
ममता बनर्जी के खिलाफ दर्ज इस मामले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा इसे हिंदू आस्था से जुड़ा मुद्दा बताकर सरकार और टीएमसी पर हमला बोल रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस फिलहाल इस पूरे मामले पर सतर्क रुख अपनाए हुए है।
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