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MP: ट्विशा शर्मा मामले में सास गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत हाईकोर्ट ने की रद्द

May 28, 2026

भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) केस में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने कड़ा फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह (Former judge Giribala Singh) को निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के फैसले को रद्द कर दिया है. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत ने मामले के तथ्यों, गवाहों के बयानों और आरोपों पर गंभीरता से विचार नहीं किया था. हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से यह नहीं कहा जा सकता कि आरोप केवल समर्थ सिंह तक सीमित हैं।

दरअसल, इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच अब CBI कर रही है. जांच एजेंसी ने हाईकोर्ट को बताया कि उसे आरोपी सास गिरिबाला सिंह से हिरासत में पूछताछ की जरूरत है. जांच एजेंसी ने उनकी जमानत रद्द करने की मांग की थी. इस पर जबलपुर बेंच में वैकेशन जज देव नारायण मिश्रा की अदालत ने 17 पन्नों के आदेश में कहा कि 15 मई 2026 को भोपाल की 10वीं अतिरिक्त सत्र अदालत द्वारा गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत आदेश को निरस्त किया जाता है।


  • हाई कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं 80(2), 85, 3(5) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धाराओं 3 और 4 के तहत दर्ज मामले में यह फैसला सुनाया. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह स्वीकार किया गया तथ्य है कि मृतका ट्विशा शर्मा प्रेग्नेंट थीं और दो महीने के भीतर उनका गर्भपात कराया गया. शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ ने ट्विशा पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया. वहीं बचाव पक्ष का दावा था कि ट्विशा स्वयं गर्भपात चाहती थीं।

    हाई कोर्ट ने कहा कि रेखारानी शर्मा, मीनाक्षी शर्मा, नवनिधि शर्मा, हर्षित शर्मा और राशि अबरोल के बयानों से साफ होता है कि 13 मई 2026 से ही सभी ने यह आरोप लगाया था कि गिरिबाला सिंह और उनका बेटा मृतका को प्रताड़ित कर रहे थे और गर्भपात कराने के लिए दबाव बना रहे थे. 14 और 15 मई को दर्ज अन्य बयानों में भी दोनों के खिलाफ स्पष्ट आरोप लगाए गए हैं।

    अदालत ने व्हाट्सएप चैट्स का भी उल्लेख किया और कहा कि इन चैट्स से यह नहीं कहा जा सकता कि आरोप केवल समर्थ सिंह के खिलाफ हैं. कोर्ट ने टिप्पणी की कि ट्रायल कोर्ट ने इन सभी तथ्यों पर समुचित विचार नहीं किया था, इसलिए अग्रिम जमानत आदेश को रद्द किया जा रहा है।

    पीड़ित परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, ‘आखिरकार ट्विशा मामले में न्याय हुआ है. गिरिबाला सिंह 36 वर्षों तक न्यायिक सेवा में रही हैं, इसलिए यदि उन्हें कानून का सम्मान है तो उन्हें समझदारी दिखाते हुए सीबीआई के सामने आत्मसमर्पण कर जांच में सहयोग करना चाहिए।

    सीबीआई को मिली आरोपी पति समर्थ की हिरासत
    इस बीच, भोपाल की एक अदालत ने बुधवार को ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह को CBI की हिरासत में भेज दिया. बाद में सीबीआई की टीम समर्थ को लेकर कटारा हिल्स स्थित गिरिबाला सिंह के घर भी पहुंची, जहां मामले में आगे की जांच की गई।

    गौरतलब है कि पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं. इसके बाद मामला सुर्खियों में आया था. सीबीआई ने सोमवार को मामले की जांच अपने हाथ में लेते हुए मध्य प्रदेश पुलिस की एफआईआर को दोबारा दर्ज किया, जिसमें समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया है।

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