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इंदौर में एक और बावड़ी की हत्या की तैयारी, प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण के दावे के बीच

May 29, 2026

जिंसी की सडक़ को चौड़ा करने में आ रहा है बावड़ी का हिस्सा
इंदौर, डा. जितेन्द्र जाखेटिया।
राज्य शासन (State Governance) के जलगंगा संवर्धन (Waterbody Conservation) अभियान के तहत एक तरफ जहां प्राकृतिक जल स्रोतों (Natural water sources) के संरक्षण के लिए काम करने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ एक और बावड़ी (Stepwell) की हत्या की तैयारी भी तेज गति से जारी है। सडक़ निर्माण को आकार देने के लिए इस बावड़ी को बंद किया जाएगा।



  • सरकार की ओर से लगातार निर्देश जारी किया जा रहा है कि सभी शहरों में जो भी कुएं, बावड़ी और तालाब हैं उनका संरक्षण किया जाए। उन्हें गहरा करने के साथ-साथ उनमें जल संग्रहण की क्षमता को बढ़ाया जाए। शासन के इस निर्देश के आधार पर इंदौर में भी नगर निगम द्वारा पूरे शहर में इस तरह का अभियान चलाने का दावा किया जाता है। एक तरफ जहां कुएं-बावड़ी को बचाने और उनके गहरीकरण का दावा है, वहीं दूसरी तरफ इसी समय एक बावड़ी की हत्या करने की भी तैयारी तेजी के साथ चल रही है। नगर निगम द्वारा मास्टर प्लान में प्रावधान की गई 23 सडक़ों का निर्माण करने की दिशा में काम किया जा रहा है। कुछ सडक़ों का निर्माण शुरू हो गया है तो कुछ सडक़ों का निर्माण शुरू करने की पहल हो गई है। निगम द्वारा हाल ही में जिंसी चौराहा से लेकर लक्ष्मीबाई प्रतिमा तक और मधुमिलन चौराहा से लेकर जगन्नाथ धर्मशाला तक की सडक़ को चौड़ा करने की राह में बाधक बन रहे निर्माणों को तोड़ा गया है। अब इन दोनों स्थानों पर सडक़ का निर्माण शुरू किया जा रहा है। दोनों स्थानों पर सडक़ बनाने के लिए खुदाई का काम शुरू हो गया है। इनमें से जिंसी वाली सडक़ पर जिंसी चौराहे के पास में ही काली मस्जिद के सामने की ओर एक बावड़ी है। इस बावड़ी का भी कुछ हिस्सा सडक़ को चौड़ा करने में बाधक बन रहा है। बताया जाता है कि यह बावड़ी करीब 70 साल पुरानी है। अब यह बावड़ी सडक़ चौड़ीकरण में आ रही है। ऐसी स्थिति में नगर निगम द्वारा बावड़ी की हत्या करने की तैयारी की जा रही है। निगम की ओर से योजना बनाई गई है कि इस बावड़ी के ऊपर सीमेंट की पक्की स्लैब भर दी जाए। एक समय था, जब इस बावड़ी से इस पूरे क्षेत्र में नागरिकों की पानी की आवश्यकता की पूर्ति होती थी। अभी इस बावड़ी के ऊपर ग्रीन नेट लगाई हुई है। आगे की तरफ कब्जा करके एक प्याऊ बनाई हुई है। उसके पास में शनिदेव का ऐतिहासिक मंदिर है।

    रानी सराय की बावड़ी को किया है बंद
    हाल ही में मेट्रो रेल के काम के लिए रानी सराय के पुलिस कंट्रोल रूम के परिसर में स्थित बावड़ी को मलबा भरकर बंद किया गया है। इस बारे में क्षेत्र के लोगों द्वारा प्रदर्शन करते हुए इस पहल का विरोध भी किया गया। इस बावड़ी की हत्या पर नगर निगम और प्रशासन की ओर से कोई टीका-टिप्पणी नहीं हुई। हर कोई इस मामले को दबाने और भुलाने में लगा हुआ है।

    कुएं को भी कर दिया है बंद
    डीआरपी लाइन चौराहा से राजकुमार मिल रेलवे ओवरब्रिज की ओर जाने वाले रास्ते पर दाईं ओर एक प्राचीन कुआं था। इस कुएं से भी क्षेत्र के लोगों की पानी की आवश्यकता की पूर्ति किसी समय पर हुआ करती थी। इस कुएं को नगर निगम ने मलबा भरकर बंद कर दिया था। जब इसके विरोध में जमकर स्वर उठे तो नगर निगम ने मलबा तो निकाल लिया, लेकिन ऊपर से स्लैब भरकर इस कुएं के नाम और निशान को भी समाप्त कर दिया है।

    ऐसी ही बावड़ी पर हुआ था हादसा
    नगर निगम द्वारा अब जिंसी की बावड़ी पर जिस तरह से सीमेंट की स्लैब डालने का फैसला लिया गया है, वैसा ही काम पटेल नगर की बावड़ी पर हुआ था। इस बावड़ी पर यह स्लैब 30 मार्च 2023 को रामनवमी के दिन धंस गई थी। इस घटना में 36 लोगों की मौत हो गई थी। अब एक बार फिर नगर निगम द्वारा पटेल नगर के जैसी स्लैब जिंसी की बावड़ी पर डालने की तैयारी की जा रही है।

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