
इंदौर| इन दिनों सबसे अधिक मुसीबत रोबोट और रेडिसन चौराहा को पार करने की है। दिनभर की इन दोनों चौराहों पर यातायात जाम रहता है और कई बार तो 3 से 4 बार में ही सिग्नल पार कर पाते हैं। अब प्राधिकरण खजराना चौराहा की तरह रोबोट चौराहा पर भी फ्लायओवर निर्मित करेगा और इसके साथ ही रेडिसन चौराहा पर भी अंडरपास की संभावना तलाशी जा रही है, जिसके चलते ट्रैफिक सर्वे के साथ मेट्रो स्टेशन के फाउंडेशन की जांच भी की जा रही है, ताकि पता लग सके कि अंडरपास में कहीं यह फाउंडेशन तो तकनीकी बाधा तो नहीं बनेगा।
अभी मेट्रो के एलिवेटेड कॉरिडोर का काम रेडिसन चौराहा तक पूरा हो गया है, तो गांधी नगर से रेडिसन तक 17 किलोमीटर में मेट्रो का व्यावसायिक संचालन शुरू किया जाना है, वहीं रोबोट चौराहा से लेकर खजराना तक वर्तमान में एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण के कारणदोनों तरफ का हिस्सा बंद कर रखा है, जिसके कारण रेडिसन चौराहा से लेकर रोबोट तक यातायात जाम की समस्या रहती है। लिहाजा इंदौर विकास प्राधिकरण रोबोट चौराहा पर भी खजराना जैसा अलग-अलग लेन का फ्लायओवर बनाना चाहता है, जिसके लिए तकनीकी जानकारी जुटाई जा रही है। आगामी बोर्ड बैठक में इस निर्माण से संबंधित प्रस्ताव रखा जाएगा। रोबोट चौराहा पर भी मेट्रो का एलिवेटेड कॉरिडोर है। लिहाजा फोरलेन का फ्लायओवर एक साथ नहीं बनाया जा सकता। लिहाजा खजराना की तरह दो-दो लेन के दो हिस्से अलग-अलग बनेंगे और बीच में मेट्रो एलिवेटेड कॉरिडोर रहेगा। जिस तरह खजराना पर प्राधिकरण द्वारा बनाए फ्लायओवर के कारण यातायात जाम की समस्या तो लगभग खत्म हो गई, लेकिन खजराना फ्लायओवर से वाहन उतरकर सीधे रोबोट चौराहा पर आकर फंस जाते हैं और उसके बाद रेडिसन चौराहा पर भी जाम की स्थिति रहती है और दोनों ही चौराहों के सिग्रल पर काफी समय लगता है, जिससे ईंधन की भी बर्बादी होती है, क्योंकि शाम के वक्त तो दो से तीन बार में ट्रैफिक सिग्नल पार हो पाता है। प्राधिकरण सूत्रों के मुताबिक, रोबोट चौराहा पर तो फ्लायओवर निर्माण में कोई समस्या नहीं है, लेकिन रेडिसन चौराहा पर भी सुगम यातायात की व्यवस्था जरूरी है, अन्यथा चौराहे पर हमेशा जाम की समस्या रहेगी, क्योंकि यहां पर किसी भी तरह का फ्लायओवर नहीं बन सकता, क्योंकि विजय नगर से आ रहा मेट्रो कॉरिडोर रेडिसन से ही रोबोट की ओर मुड़ता है। लिहाजा यहां पर अंडरपास की संभावना तलाशी जा रही है।
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