
उज्जैन। अंग्रेजों ने करीब 100 साल पहले छत्रीचौक की पानी की टंकी को बनाया था जो इतने सालों तक प्यास बुझाती रही और इतना अच्छा निर्माण केवल अंग्रेज ही कर सकते थे..हमारे यहाँ तो आज यह हालत है कि कोई भी निर्माण कुछ साल में ही दरकने लगता है। अंग्रेज देश छोड़ गए लेकिन जिम्मेदारों ने उनकी अच्छाईयाँ नहीं सीखी।
छत्रीचौक की सब्जी मंडी चौराहा को टंकी चौक के नाम से जाना जाता है। आजादी के पहले से अंग्रेजों द्वारा यह पानी की टंकी शहर में जल प्रदाय के लिए सबसे पहले बनाई गई थी लेकिन अभी यह टंकी हटने वाली है। आने वाले दिनों में सिर्फ बोली चाली की भाषा में टंकी चौक नाम रह जाएगा, क्योंकि टंकी अब पूरी तरह हट रही है। करीब 100 साल से पहले उज्जैन में अंग्रेजों ने पानी की टंकी बनाई थी। शहर की कई पीढिय़ों ने इसे देखा लेकिन अब छत्रीचौक क्षेत्र के समुचित विकास के लिए पानी की है, टंकी हटाई जा रही है और आसपास की दुकान भी यहाँ से हटा दी गई है। यह पानी की टंकी पूरी तरह से लोहे के एंगल पर टिकी हुई थी। टंकी में ऊपर तांबे की प्लेट लगी थी जिससे पानी हमेशा शुद्ध रहता था। अब इसे पूरी तरह हटा दिया गया है। नीचे के एंगल भी खोले जा रहे हैं। अब सिर्फ बोली चाली की भाषा में नाम के लिए टंकी चौक रहेगा लेकिन टंकी नहीं दिखेगी।
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