नई दिल्ली। भारत में अशांति फैलाने की कथित कोशिशों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों (security agencies) ने गंभीर चिंता जताई है। अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence (ISI) ने अपने ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) नेटवर्क को मुख्यधारा की राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों में कथित रूप से घुसपैठ करने के निर्देश दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि इसका उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी और आतंकी मामलों की जांच से बचने के लिए वैध राजनीतिक ढांचे का इस्तेमाल करना हो सकता है।
अधिकारियों के मुताबिक, ISI जम्मू-कश्मीर में अपनी पुरानी रणनीति को नए रूप में लागू करने की कोशिश कर रही है। दावा है कि 1990 के दशक में सक्रिय रहे कुछ आतंकी संगठनों को दोबारा सक्रिय कर आतंकवाद को “स्थानीय स्वरूप” देने की कोशिश हो रही है, ताकि सीमा पार की कथित भूमिका को छिपाया जा सके। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब पाकिस्तान पर आतंक वित्तपोषण और धनशोधन के मामलों को लेकर वैश्विक निगरानी बनी हुई है।
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, हाल में गिरफ्तार किए गए कुछ संदिग्ध आतंकी समर्थकों से पूछताछ के दौरान यह संकेत मिले कि कुछ लोग राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से जुड़े हुए थे। अधिकारियों का कहना है कि कथित तौर पर रसद सहायता, भर्ती और वित्तीय मदद उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क को राजनीतिक ढांचे के भीतर जगह देकर सुरक्षा कार्रवाई से बचाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।
अधिकारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि लगातार सुरक्षा दबाव के कारण पारंपरिक नेटवर्क कमजोर पड़ने के बाद ऐसी रणनीति सामने आ रही है। उनका कहना है कि नए छद्म आतंकी संगठनों को स्थानीय समर्थन सीमित मिलने के कारण पुराने संगठनों और ऐतिहासिक नैरेटिव का सहारा लेने की कोशिश की जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियां उन संगठनों की गतिविधियों पर भी नजर बनाए हुए हैं, जो लंबे समय से निष्क्रिय माने जाते थे। इनमें कथित तौर पर (Al-Umar Mujahideen, Al-Badr) और (Tehreek-ul-Mujahideen) जैसे समूहों के नाम फिर चर्चा में आने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि इन संगठनों का शीर्ष नेतृत्व पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद ठिकानों से संचालित हो सकता है, जबकि जमीनी नेटवर्क प्रचार, धन जुटाने और कट्टरपंथ फैलाने की गतिविधियों को पुनर्गठित करने में लगा है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि सुरक्षा एजेंसियां ऐसे किसी भी लॉजिस्टिक नेटवर्क और वैचारिक कट्टरपंथ फैलाने की कोशिशों को निष्क्रिय करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि या सार्वजनिक साक्ष्य फिलहाल सामने नहीं आए हैं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved