
नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran–United States War) के बीच केंद्र सरकार (Central government) ने एविएशन सेक्टर (Aviation Sector) को बड़ी राहत दी है. सरकार ने 10,000 करोड़ के ATF (एविएशन टरबाइन फ्यूल) फंड को मंजूरी दी है. यानी पेट्रोलियम मंत्रालय तेल कंपनियों (OMCs) को बिना किसी ब्याज के एडवांस पैसा देगा. यह मदद इसलिए दी जा रही है ताकि पश्चिम एशिया के संकट की वजह से एविएशन फ्यूल के दाम में हो रहे भारी उतार-चढ़ावा को काबू किया जा सके और एयरलाइंस कंपनियों को कोई परेशानी न हो. सरकार के इस फैसले से एविएशन सेक्टर से जुड़ी 77 लाख जॉब्स सुरक्षित रहने की उम्मीद है.
कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, टआज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने कई बड़े और जरूरी फैसले लिए हैं. आज 6 बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई है. पहला फैसला हवाई जहाज के ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतों और एविएशन सेक्टर पर इसके असर को लेकर है, जो पश्चिम एशिया के संकट की वजह से हुआ है. इस असर को कम करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का ‘ATF प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड’ बनाया गया है.
1. OMCs को बिना ब्याज के 10,000 करोड़ रुपये
सरकार तेल कंपनियों को 10,000 करोड़ रुपये तक की सहायता देगी. इससे वे एयरलाइंस को कम कीमत पर ATF उपलब्ध करा सकेंगी.
2. बाद में सरकार को पैसा वापस मिलेगा
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ATF की कीमतें कम होंगी, तब तेल कंपनियां यह राशि सरकार को वापस करेंगी. यह प्रक्रिया तब तक चलेगी जब तक पूरी राशि की वसूली नहीं हो जाती.
3. सभी भारतीय एयरलाइंस को लाभ
यह योजना उन सभी भारतीय एयरलाइंस के लिए उपलब्ध होगी जो इसमें शामिल होना चाहें. इसका फायदा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों को मिलेगा.
4. ईंधन की तय कीमत
इस व्यवस्था के तहत एयरलाइंस को ईंधन की अधिक स्थिर और अनुमानित कीमत मिलेगी. इससे अचानक कीमत बढ़ने का खतरा कम होगा और कंपनियां बेहतर वित्तीय योजना बना सकेंगी.
5. केवल OMCs से खरीदना होगा ATF
योजना में शामिल एयरलाइंस को अधिकतम तीन साल तक केवल सरकारी तेल कंपनियों से ही ATF खरीदना होगा. इस व्यवस्था की हर साल समीक्षा की जाएगी.
इससे क्या फायदा होगा?
एयरलाइंस के ऑपरेशन में स्थिरता आएगी.
हवाई किरायों में अचानक बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम होगी.
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाएं जारी रखने में मदद मिलेगी.
छोटे शहरों, क्षेत्रीय और दूरदराज इलाकों की हवाई कनेक्टिविटी बनी रहेगी.
पर्यटन, व्यापार, होटल, लॉजिस्टिक्स और निवेश जैसे क्षेत्रों को फायदा मिलेगा.
एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर उपयोग हो सकेगा.
यह योजना क्यों जरूरी पड़ी?
पश्चिम एशिया संकट के कारण ATF की कीमतों में भारी उछाल आया है. मार्च 2026 में ATF की अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 60.50 रुपये प्रति लीटर थी. मई 2026 तक यह बढ़कर करीब 142 रुपये प्रति लीटर हो गई. यानी सिर्फ दो महीनों में कीमत लगभग 2.5 गुना बढ़ गई. एयरलाइंस के कुल ऑपरेशन खर्च का लगभग 40% हिस्सा ATF पर खर्च होता है. ईंधन की कीमतें बहुत अधिक बढ़ने पर यह हिस्सा 60% तक पहुंच सकता है. इसके अलावा, भारतीय एयरलाइंस के लिए पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र बंद होने से यूरोप, उत्तरी अमेरिका और मध्य एशिया जाने वाली उड़ानों को लंबे रास्ते से जाना पड़ रहा है. इससे ईंधन की खपत और लागत दोनों बढ़ गई हैं. इन्हीं कारणों से सरकार ने यह विशेष राहत योजना शुरू करने का फैसला किया है, ताकि एयरलाइंस, यात्रियों और पूरे विमानन क्षेत्र को आर्थिक झटके से बचाया जा सके.
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