
नई दिल्ली । ज्येष्ठ मास (Jyeshtha Month) के कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha) की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली कालाष्टमी (Kalashtami) इस वर्ष 8 जून 2026 को पड़ रही है। सनातन परंपरा में इस दिन भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप काल भैरव (Kaal Bhairav) की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काल भैरव की आराधना से जीवन की नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है और व्यक्ति को साहस, सुरक्षा तथा मानसिक शांति (Mental Peace) की प्राप्ति होती है। इस बार कालाष्टमी का महत्व इसलिए भी विशेष माना जा रहा है क्योंकि यह पुरुषोत्तम मास के दौरान पड़ रही है।
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी तिथि का आरंभ 8 जून को प्रातः 3 बजकर 24 मिनट पर होगा, जबकि इसका समापन 9 जून को प्रातः 3 बजकर 23 मिनट पर होगा। इस दौरान श्रद्धालु व्रत रखकर और विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करके उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रयास करेंगे। धार्मिक ग्रंथों में काल भैरव को धर्म और न्याय के रक्षक के रूप में वर्णित किया गया है। ऐसी मान्यता है कि उनकी उपासना से शनि, राहु और केतु से जुड़े कष्टों में भी राहत मिलती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी के दिन कुछ कार्यों से विशेष रूप से बचना चाहिए। इस दिन कुत्तों को किसी प्रकार की चोट पहुंचाना या उन्हें जूते-चप्पल से मारना अत्यंत अशुभ माना गया है। कुत्ते को काल भैरव का वाहन और प्रतीक माना जाता है, इसलिए उसके प्रति सम्मान और करुणा का भाव रखने की सलाह दी जाती है।
इसी प्रकार कालाष्टमी के दिन कुत्तों को जूठा भोजन खिलाने से भी बचने की मान्यता है। धार्मिक दृष्टि से इसे काल भैरव के अनादर के रूप में देखा जाता है। श्रद्धालुओं को इस दिन काले कुत्ते को ताजी रोटी, दूध, गुड़ या मीठे बिस्कुट खिलाने की सलाह दी जाती है, जिसे पुण्यदायी माना जाता है।
व्रत रखने वाले लोगों के लिए नियमों का पालन करना भी महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि व्रत के दौरान नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। सूर्योदय से सूर्यास्त तक संयम और सात्विकता बनाए रखने को व्रत का प्रमुख अंग माना जाता है। इसके अलावा मांसाहार और मदिरा से भी दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तामसिक भोजन और नशे का सेवन पूजा-पाठ के प्रभाव को कम कर सकता है।
कालाष्टमी पर अनैतिक और अनुचित कार्यों से भी दूर रहने की बात कही जाती है। काल भैरव को न्याय और अनुशासन का देवता माना जाता है, इसलिए इस दिन सत्य, संयम और सदाचार का पालन विशेष महत्व रखता है। धार्मिक आस्था रखने वाले लोग इस अवसर पर अपने व्यवहार और आचरण को भी शुद्ध रखने का प्रयास करते हैं।
पूजा और उपायों की बात करें तो कालाष्टमी पर काल भैरव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा उड़द की दाल, काले तिल और सरसों का तेल दान करने की परंपरा भी प्रचलित है। श्रद्धालु काले कुत्ते को दूध या दूध से बनी रोटी खिलाकर भी पूजा का पुण्य प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन उपायों से जीवन में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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