
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान (Iran) के साथ अंतिम और व्यापक समझौता होने तक तेहरान की फ्रीज की गई संपत्तियों (Freezed assets) को रिहा नहीं किया जाएगा और न ही आर्थिक प्रतिबंधों में कोई ढील दी जाएगी। कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में दिए गए विशेष साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्थिक दबाव में कोई कमी तभी आएगी, जब ईरान एक व्यापक समझौते पर सहमत होगा और अपनी सभी प्रतिबद्धताओं का सख्ती से पालन करेगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या किसी अस्थायी समझौते से पहले प्रतिबंधों में ढील या फ्रीज संपत्तियों तक पहुंच दी जा सकती है, तो ट्रंप ने जवाब दिया कि बाद में… हां। अगर वे अच्छा व्यवहार करेंगे और सही काम करेंगे तो हम आगे बढ़ेंगे। इस दौरान ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वे लेबनान को तेहरान के साथ किसी अल्पकालिक समझौते में शामिल करने के लिए कोई दबाव नहीं डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि वे इसे देखना चाहेंगे, लेकिन मैं इस पर जोर नहीं दे रहा हूं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भविष्य के किसी भी समझौते में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के अलावा अन्य महत्वपूर्ण शर्तें भी शामिल होंगी। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान मिलकर ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम को हटाने और नष्ट करने का काम करेंगे। ट्रंप ने कहा कि अगर हम यह समझौता कर लेते हैं कि अब हम मित्रवत हैं, तो हम सब साथ जाएंगे। यह हमारा उपकरण होगा। हम इसे बाहर निकालेंगे और नष्ट कर देंगे… चाहे वह परिसर में हो या बाहर ले जाया जाए। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत विफल रही तो अमेरिका ‘सैन्य रूप से बहुत सख्ती’ से कार्रवाई करेगा।
दूसरी ओर, ईरान ने ट्रंप के दावों का लगातार खंडन किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि समृद्ध यूरेनियम को कहीं स्थानांतरित करने का कोई समझौता नहीं हुआ है और न ही बातचीत में ऐसा कोई प्रस्ताव रखा गया था। बता दें कि अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए थे। हमलों के बाद ईरान के परमाणु स्थलों को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है।
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, हमलों से पहले जून 2025 में ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम था, जो 2015 के परमाणु समझौते की निर्धारित सीमा से कहीं अधिक है। फिलहाल अभी दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन दोनों ओर से सख्ती बरती जा रही है।
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