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विशेष प्रवचन देने आए इन्द्रेश महाराज की एक झलक पाने के लिए परेशान होते रहे इंदौरी भक्त

June 19, 2026

इंदौर। कल अभय प्रशाल में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। जो लोग बैठ गए वे बैठ गए। जिसे जहां जगह मिली वहीं खड़े हो गया और उससे ज्यादा व्याकुल वे लोग दिखाई दिए, जो अभय प्रशाल के बाहर खड़े थे, लेकिन अंदर जगह नहीं होने के कारण उन्होंने करीब एक घंटे तक बाहर खड़े-खड़े ही प्रवचन सुने।
इस एक दिनी प्रवचन में कल पहली बार संतश्री इंद्रेश महाराज के दर्शन के लिए हजारों की संख्या में इंदौरी भक्त पहुंच गए। माहेश्वरी समाज की ओर से महेश नवमी पर्व की शुरुआत पर यह आयोजन रखा गया था, जिसकी जानकारी लगते ही कल अभय प्रशाल खचाखच भर गया। जितने लोग अंदर थे, उससे आधे से अधिक लोग बाहर खड्े थे। जब इंद्रेश महाराज अभय प्रशाल पहुंचे तो उन्हें बड़ी मुश्किल से मंच तक ले जाया गया।


  • लोग उनकी एक झलक पाने को आतुर थे और उनके पैर छूकर दर्शन करना चाह रहे थे, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें मंच पर पहुंचाया गया। मंच पर पहुंचते से ही इंद्रेश महाराज ने कहा कि मेरी व्यस्तताएं बहुत ज्यादा थीं और आज इंदौर आना मुश्किल था, लेकिन जब संतों का आदेश होता है तो टालना असंभव होता है। छत्रीबाग के स्वामी विष्णुप्रपन्नाचार्य के आदेश को मुझे स्वीकारना ही पड़ा। समाज के अध्यक्ष सत्यनारायण मंत्री पप्पू, मंत्री मुकेश असावा एवं मुख्य अजमान नवल मूंदडा ने उनका स्वागत किया। इंद्रेश महाराज ने जगन्नाथ भगवान को लेकर कथा सुनाई, जो आज तक अनसुनी थी। उन्होंने कहा कि जब भीषण कलियुग आएगा, तब हमारे कई तीर्थ की आध्यात्मिक ऊर्जा का क्षय हो जाएगा, हमारी पवित्र नदियां सूख जाएंगी, तब भी भगवान जगन्नाथ अपने दिव्य स्वरूप में विराजित रहेंगे।

    आपने कहा कि वर्ष में एक बार जगन्नाथ मंदिर जाकर अपने सभी पापों को भगवान को समर्पित कर देना चाहिए। वह दयालु हैं, सब स्वीकार करते हैं, लेकिन उसके बाद फिर पाप कर्म नहीं करना चाहिए। आपने कहा कि मैं इंदौर का ऋणी हूं और ऋण चुकाने बार-बार आता हूं। आपने चारों युगों के विशिष्ट धाम के बारे में बताते हुए कहा कि सतयुग में बद्रीनाथ धाम, त्रेता में श्री रंगनाथ, द्वापर में द्वारिका और कलियुग में प्रभु का प्रमुख धाम जगन्नाथ ही है। उन्होंने कहा कि मानव का चार्जिंग पॉइंट भगवान जगन्नाथ के दर्शन करना है। नर्मदा नदी की पवित्रता का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि नर्मदा साक्षात बहते हुए शिव है। आपने कलियुग की निशानी बताते हुए कहा कि जब गलत काम करने में लज्जा आना बंद हो जाए तो समझ लीजिए कि कलियुग आ गया है। करीब एक घंटे तक चले प्रवचन के दौरान, जो भक्त जहां था, वहीं खड़े रहकर उनके प्रवचन सुनता रहा।

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