
- 6100 लोगों पर जुर्माना लगाने की तैयारी में जुटा निगम
- 1.08 लाख व्यावसायिक बिजली कनेक्शन के पते पर जांच
- अब तक 65 हजार स्थान जाकर देखे
इंदौर। बिजली के बिल (electricity bills) ने 7189 व्यक्तियों की पोल खोल (exposed) दी है। इनमें से 6100 लोगों पर जुर्माना लगाने के लिए नगर निगम (Municipal council) द्वारा फाइल तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है। इस बार निगम गूगल अर्थ की मदद लेते हुए इन सभी लोगों से टैक्स के रूप में बड़ी राशि वसूलने की तैयारी कर रहा है।
नगर निगम द्वारा पिछले दिनों मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से इंदौर शहर में बिजली के कनेक्शन की विस्तृत जानकारी ली गई थी। इसमें खासतौर पर यह जानकारी ली गई थी कि इंदौर शहर में किस-किस पते पर किसके नाम का बिजली कनेक्शन है। इनमें से कौन सा कनेक्शन आवासीय उपयोग का है और कौन सा व्यावसायिक उपयोग का है। यह जानकारी लेने के बाद नगर निगम द्वारा अपने सभी जोनल कार्यालय के सहायक राजस्व अधिकारी और वार्ड के बिल कलेक्टर को उनके क्षेत्र के बिजली के व्यावसायिक कनेक्शन की सूची दे दी गई। इन्हें निर्देश दिया गया कि सूची में दर्ज किए गए पते पर जाकर निगम के रिकॉर्ड से चेक करें कि क्या संबंधित व्यक्ति द्वारा व्यावसायिक दर से संपत्ति कर का भुगतान किया जा रहा है।
बिजली कंपनी से नगर निगम को 1.08 लाख लोगों के नाम की सूची मिली थी। इस सूची में से नगर निगम अब तक 63000 नाम की जांच पते पर जाकर कर चुका है। निगम के अपर आयुक्त राजस्व आकाश सिंह ने बताया कि जांच में 1089 तो ऐसे पते मिले हैं, जिनका नगर निगम में संपत्ति कर का खाता ही नहीं है। इन लोगों का संपत्ति कर खाता खोलने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसमें संबंधित व्यक्ति से यह जानकारी ली जाएगी कि उसके द्वारा कब से इस स्थान का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही गूगल अर्थ से इमेज देखकर भी जानकारी निकाली जाएगी। यदि उस स्थान का नक्शा नगर निगम से मंजूर कराया गया होगा तो नक्शा मंजूरी के समय से लेकर अब तक का टैक्स इन लोगों पर लगाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस जांच में 6100 स्थान ऐसे मिले हैं, जहां व्यावसायिक गतिविधि का संचालन किया जा रहा था, लेकिन नगर निगम को आवासीय गतिविधि के हिसाब से टैक्स दिया जा रहा था। इन स्थानों पर संपत्ति की श्रेणी में परिवर्तन करते हुए उसे व्यावसायिक श्रेणी का करने का काम किया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित व्यक्ति पर 3 साल का जुर्माना भी लगाया जाएगा। इसमें भी हर मामले की अलग-अलग फाइल तैयार करने का काम शुरू किया गया है। मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम के प्रावधान के अनुसार जिस संपत्ति पर टैक्स चोरी का जुर्माना लगाया जाता है, वह जुर्माना 3 वर्ष से अधिक अवधि का नहीं लगाया जा सकता है। इस प्रावधान को ध्यान में रखते हुए इन सभी व्यक्तियों पर आवासीय दर और व्यावसायिक दर की अंतर राशि की टैक्स चोरी का मामला बनाया जा रहा है।
जनगणना के आंकड़ों पर भी देंगे ध्यान
इसके साथ ही अब नगर निगम द्वारा आने वाले समय में जनगणना में एकत्र किए गए आंकड़ों पर भी ध्यान देने की तैयारी की जा रही है। जनगणना के प्रथम चरण में अभी मकान गणना का कार्य किया गया है। इस दौरान पूरे शहर के मकानों की स्थिति का आकलन सामने आ चुका है। अब नगर निगम द्वारा इस मकान गणना में सामने आई जानकारी का भी उपयोग करने की तैयारी की जा रही है।