
उज्जैन। मानसून दस्तक देने को है, लेकिन शहर में बरसात की दिक्कतों से निपटने की तैयारियाँ अब भी अधूरी हैं। फ्लाईओवर, कॉरिडोर और चौड़ीकरण की वजह से सड़कें खुदी पड़ी हैं, तो दूसरी तरफ हर साल जलभराव से जूझने वाले इलाके के लोग फिर चिंता में है। साल बदले, लेकिन इलाकों के हालात नहीं।
उज्जैन में सिंहस्थ के काम चल रहे हैं। चाहे इंदौर रोड हो या, मक्सी, आगर-मालवा, बडऩगर रोड। बीच शहर में भी काम चल रहे हैं। बारिश में काम की रफ्तार धीमी होगी, पर मुसीबतें बढ़ जाएगी। ये निर्माण कार्य मानसून में हादसों को निमंत्रण दे रहे हैं। सवाल यह है कि पहली तेज बारिश के बाद क्या ये शहर सामान्य रहेंगे या फिर सड़कें तालाब और चौराहे झील में बदल जाएंगे? सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन में करीब 13 हजार करोड़ रुपए के विकास कार्य चल रहे हैं। इनमें सड़क चौड़ीकरण, ब्रिज, टनल, एलिवेटेड कॉरिडोर, रोप-वे, शॉपिंग मॉल, नगर निगम पार्किंग, महाकाल मंदिर विस्तार और मेडिसिटी परियोजना शामिल हैं। ऐसे में मानसून के दौरान निर्माणाधीन स्थलों पर आम लोगों की परेशानी और हादसों का खतरा बढ़ गया है। कोयला फाटक से तेलीवाड़ा चौराहा तक सड़क चौड़ीकरण और सीवरेज कार्य के लिए खोदी गई सड़कों पर हाल की बारिश में कई लोग गिर चुके हैं। इसके अलावा गेल इंडिया-नीलगंगा चौराहा, टैगोर चौराहा-दो तालाब, राजस्व कॉलोनी मार्ग, नानाखेड़ा-शांति पैलेस, बिजासन माता मंदिर-देवास रोड और गाड़ी अड्डा चौराहा से रणकेश्वर महादेव मंदिर तक निर्माणाधीन मार्गों पर खुले गड्ढे खतरा बने हुए हैं। रीगल टॉकीज स्थित निर्माणाधीन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के बेसमेंट में जलभराव की आशंका है, जबकि छत्री चौक-सत्यनारायण मंदिर मार्ग, कमरी मार्ग चौराहा और हरसिद्धि पाल से रामघाट तक चौड़ीकरण कार्य के दौरान बने बड़े गड्ढों से भी दुर्घटना की संभावना बनी हुई है। हालांकि निगम आयुक्त अभिलाष मिश्र ने आगामी बारिश के मौसम को देखते हुए सभी प्रचलित चौड़ीकरण कार्यों में बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जोनल अधिकारी,उपयंत्री, सहायक यंत्री अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। बारिश के दौरान सुरक्षा के साथ मार्ग पर मौजूद मलबा एवं जल भराव का त्वरित निराकरण करने और वर्षाकाल में मार्ग में मौजूद मलबा को हटाकर नालियों की सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश भी दिए हैं।