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पंजाब कांग्रेस में बढ़ी गुजबाजी…. विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व में बदलाव की कवायद

June 26, 2026

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Elections) से पहले कांग्रेस (Congress) अपने राज्य नेतृत्व में बदलाव पर विचार कर रही है। हालांकि, नई टीम को लेकर की जा रही इस कवायद ने गुटबाजी को सुलझाने के बजाय पार्टी के अंदर कन्फ्यूजन को और ज्यादा बढ़ा दिया है। राज्य के वरिष्ठ पदाधिकारियों के इंटरव्यू और लगातार हो रही रिव्यू मीटिंग्स (Review Meetings) ने प्रदेश में शीर्ष नेतृत्व बदले जाने की चर्चाओं को हवा दे दी है। इसके चलते पार्टी के नेता और कार्यकर्ता एक बार फिर अपनी-अपनी वफादारी के हिसाब से खेमों में बंटे हुए नजर आ रहे हैं।

क्यों महसूस हुई बदलाव की जरूरत?
पंजाब कांग्रेस की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के लिए पार्टी ने एक कमेटी का गठन किया है, जिसकी सिफारिशों पर जल्द ही फैसला लिया जाना है। शीर्ष नेतृत्व की दोबारा समीक्षा करने के पीछे ये मुख्य कारण हैं-
– फिलहाल पंजाब कांग्रेस का ढांचा एकतरफा नजर आता है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष (LoP) दोनों ही अहम पद एक ही समुदाय (सिख जाट) के पास हैं।
– 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) की प्रचंड लहर के सामने कांग्रेस 117 में से महज 18 सीटों पर सिमट गई थी। इस करारी हार के बाद जल्दबाजी में अहम पदों पर ये नियुक्तियां की गई थीं।
– पारंपरिक तौर पर कांग्रेस अपने संगठन में दलित और हिंदू चेहरों को भी अहम जिम्मेदारी देती रही है, ताकि राज्य के इन प्रभावशाली सामाजिक वर्गों के बीच सही संदेश जाए। इसी असंतुलन को दूर करने की कोशिश की जा रही है।


  • बता दें कि हाल ही में भारतीय जनता पार्टी ने भी सरदार केवल सिंह ढिल्लों को अपनी पंजाब इकाई का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। वे बरनाला के पूर्व विधायक और एक प्रमुख जाट सिख नेता हैं।

    टाइमिंग को लेकर पार्टी के अंदर बेचैनी
    पार्टी के ही कई पदाधिकारियों का कहना है कि वे पिछले कुछ महीनों से ठीक इसी स्थिति (गुटबाजी) से बचने की कोशिश कर रहे थे। उनका मानना है कि पंजाब जैसी गुटबाजी के लिए मशहूर राज्य इकाई में इतने बड़े फेरबदल के लिए अब बहुत कम समय बचा है।

    अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, शीर्ष स्तर पर बदलाव की यह कवायद अब काफी देर से हो रही है। अगर राज्य का शीर्ष नेतृत्व बदला जाता है, तो निचले स्तर के उन पदाधिकारियों के साथ तालमेल बिगड़ सकता है, जो पिछले चार सालों से मौजूदा लीडरशिप के प्रति वफादार रहे हैं।

    कई नेताओं का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन से पार्टी की एकजुटता पर सीधा असर पड़ सकता है, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) से मुकाबले में जीत हासिल करने के लिए कांग्रेस का एकजुट रहना सबसे ज्यादा जरूरी है।

    हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को पंजाब के पांच वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और उनसे आगामी विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने को कहा। राहुल ने जोर देकर कहा कि पार्टी की पंजाब इकाई में संगठनात्मक बदलावों की चर्चा के बीच राज्य में कांग्रेस के पास ‘बहुत अच्छा मौका’ है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा एवं विजय इंदर सिंगला ने सोनिया गांधी के आवास ’10, जनपथ’ पर राहुल गांधी से मुलाकात की। पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं।

    कांग्रेस के सामने धर्मसंकट की स्थिति
    नेतृत्व को लेकर कांग्रेस के सामने एक अजीब स्थिति पैदा हो गई है। अगर पार्टी अपने मौजूदा नेतृत्व के साथ ही आगे बढ़ती है, तो उस पर सामाजिक संतुलन न बना पाने का ठप्पा लग सकता है। पार्टी के एक सदस्य ने इसी दुविधा पर चिंता जताते हुए कहा, “यही कारण है कि इस मुद्दे को सार्वजनिक तौर पर कभी भी नहीं खोला जाना चाहिए था।”

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