
उज्जैन। शहर में 50 से ज्यादा आरा मशीनें चल रही हैं, लेकिन लाइसेंस सिर्फ गिनती के ही पास हैं। आलम यह हैं कि शहर में कई फर्नीचर और लकड़ी उद्योग वाले एक मशीन का लाइसेंस लेकर दो से तीन मशीनें संचालित कर रहे हैं। इस सबकी जानकारी वन विभाग को बखूबी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो रहा।
उल्लेखनीय यह है कि उज्जैन रेंज के अंतर्गत वन विभाग ने करीब 30 आरा मशीनों को लाइसेंस दिए हैं लेकिन 50 से ज्यादा छोटी बड़ी आरा मशीनों का संचालन शहर में संचालित फर्नीचर उद्योग और लकड़ी उद्योग वाले लोग चोरी छिपे कर रहे हैं। कई फर्नीचर उद्योग संचालकों ने यह मशीनें कारखानों से अलग दूसरी जगहों पर लगवाई हैं ताकि इन्हें पकड़ा न जा सके। इन मशीनों पर अधिकतर अवैध लकडिय़ां ही चिराई के लिए लाई जाती हैं। इससे अवैध मशीन संचालक मोटी कमाई कर रहे हैं। जो कई सालों से वन विभाग को राजस्व का चुना भी लगा रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते अवैध आरा मशीन बेधड़क संचालित हो रही हैं। अगर यही सिलसिला कुछ और वर्षों तक चलता रहा तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
कई सालों से जाँच तक नहीं…
जिले में लाइसेंस शुदा आरा मशीन संचालक को लकड़ी चीरने के दौरान वृक्ष का नाम, चिराई के बाद लकड़ी को बेचने और बचने वाली लकड़ी का विवरण रजिस्टर में अंकित करना होता है। इसके अलावा आरा मशीन परिसर में सूचना पट्ट पर मशीन के बारे में जानकारी, लकडिय़ों का स्टॉक तथा लाइसेंस रखना आवश्यक है लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले आरा मशीन संचालकों के खिलाफ कार्रवाई तो दूर वार्षिक जांच तक समय पर नहीं की जाती है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved