नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi government) में एक बार फिर संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चाएं तेज हैं। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र से पहले मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) में बदलाव हो सकता है।
ऐसे में पांच साल पहले हुए मोदी सरकार के सबसे बड़े कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की चर्चा फिर से शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में 7 जुलाई 2021 को हुए इस बदलाव को उनकी सरकार का सबसे बड़ा मंत्रिमंडलीय पुनर्गठन माना गया था।
2021 के फेरबदल में सरकार ने कई बड़े और चर्चित चेहरों को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया था। कुल 12 मंत्रियों ने इस्तीफा दिया था। इनमें तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, कानून एवं आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद, पर्यावरण एवं सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल थे।
इसके अलावा सदानंद गौड़ा, संतोष गंगवार, थावरचंद गहलोत और बाबुल सुप्रियो समेत कई अन्य नेताओं ने भी मंत्रिपद छोड़ा था। यह फेरबदल कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बाद सरकार के कामकाज की समीक्षा के रूप में भी देखा गया था।
राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित समारोह में कुल 43 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली थी। इनमें 15 कैबिनेट मंत्री और 28 राज्य मंत्री शामिल थे। इस विस्तार के बाद प्रधानमंत्री समेत मंत्रिपरिषद के सदस्यों की संख्या लगभग 77-78 तक पहुंच गई थी, जो संवैधानिक सीमा 81 से कुछ कम थी।
2021 के विस्तार में असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे और राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था।
इसके अलावा वीरेंद्र कुमार, अश्विनी वैष्णव, आरसीपी सिंह, पशुपति कुमार पारस और भूपेंद्र यादव को भी कैबिनेट में जगह मिली। वहीं किरेन रिजिजू, आर.के. सिंह, हरदीप सिंह पुरी, मनसुख मांडविया, पुरुषोत्तम रूपाला, जी. किशन रेड्डी और अनुराग ठाकुर को पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
फेरबदल के दौरान धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई, जबकि हरदीप सिंह पुरी को पेट्रोलियम मंत्रालय का कार्यभार दिया गया।
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने राज्य के सात नेताओं को राज्य मंत्री बनाया था। इनमें पंकज चौधरी, अनुप्रिया पटेल, भानु प्रताप सिंह वर्मा, कौशल किशोर, एसपीएस बघेल, अजय कुमार और बीएल वर्मा शामिल थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि इस फेरबदल के जरिए सरकार ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के साथ-साथ आगामी चुनावों को भी ध्यान में रखा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के बीच एक बार फिर मंत्रिमंडल में बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यदि फेरबदल होता है तो इसका उद्देश्य सरकार के प्रदर्शन की समीक्षा, नए चेहरों को अवसर देना, सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व देना और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयारी करना हो सकता है। हालांकि केंद्र सरकार ने अभी तक किसी भी फेरबदल, संभावित तारीख या मंत्रियों के नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
हाल के दिनों में केंद्रीय मंत्रियों के विभाग बदलने या कुछ नए चेहरों को शामिल किए जाने को लेकर कई तरह की अटकलें सामने आई हैं। लेकिन फिलहाल इन्हें केवल राजनीतिक चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टों के रूप में ही देखा जा रहा है। आधिकारिक घोषणा होने के बाद ही किसी भी बदलाव की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।
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