लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले (Ram Mandir offering theft case) की जांच के दौरान एसआईटी को भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य मिले हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट से इस्तीफा (Trust, resignation) दे चुके सदस्य अनिल मिश्रा (Anil Mishra) की सिफारिश पर मंदिर प्रबंधन में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्तियां हुई थीं। जांच एजेंसी अब इन नियुक्तियों और चोरी के मामले के बीच संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर जांच में सामने आए तथ्य
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की जांच में पता चला है कि मंदिर प्रबंधन में नियुक्त किए गए कर्मचारियों में सबसे अधिक संख्या उन लोगों की थी, जिनकी सिफारिश अनिल मिश्रा ने की थी। बताया जा रहा है कि उनकी अनुशंसा पर 125 से अधिक लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। वहीं, अन्य पदाधिकारियों से जुड़े लोगों की संख्या इससे काफी कम बताई जा रही है। हालांकि इन दावों पर अभी तक एसआईटी की आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।
अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों में टिन्नू यादव का नाम सामने आया है, जिसे जांच से जुड़े सूत्र ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का करीबी बता रहे हैं। वहीं, आरोपी सुभाष श्रीवास्तव सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी है। अन्य छह आरोपी एक निजी एजेंसी के माध्यम से बैंक की ओर से संविदा पर नियुक्त किए गए थे। जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि इन नियुक्तियों में किस स्तर पर सिफारिश या प्रभाव का इस्तेमाल हुआ।
रिश्तेदारों की भूमिका पर भी नजर
जांच में अनुकल्प और लवकुश मिश्रा के नाम भी सामने आए हैं। सूत्रों का दावा है कि दोनों का संबंध अनिल मिश्रा के परिवार से है और उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि नियुक्तियों में पारदर्शिता बरती गई थी या नहीं तथा कहीं व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर लोगों को जिम्मेदारियां तो नहीं सौंपी गईं।
कर्मचारियों को हटाने के प्रस्ताव का हुआ था विरोध
सूत्रों के अनुसार, जब एक बैंक अधिकारी ने गणनाकर्मियों को बदलने या हटाने का सुझाव दिया था, तब ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों ने इसका विरोध किया था। आरोप है कि अनिल मिश्रा सहित कुछ अन्य लोगों ने कर्मचारियों को हटाने के प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। जांच एजेंसी अब यह भी पता लगा रही है कि उस समय कर्मचारियों को बनाए रखने के पीछे क्या कारण थे और क्या उसका मौजूदा मामले से कोई संबंध है।
संपत्ति और कथित कमीशन के आरोपों की भी जांच
एसआईटी अनिल मिश्रा पर लगे कथित कमीशन लेने के आरोपों की भी जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान उनकी चल-अचल संपत्तियों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। एजेंसी यह आकलन कर रही है कि ट्रस्ट से जुड़ने के बाद उनकी संपत्ति में कितना इजाफा हुआ और क्या उसमें किसी प्रकार की अनियमितता के संकेत मिलते हैं।
फिलहाल एसआईटी विभिन्न पहलुओं पर साक्ष्य जुटाने में लगी है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। इस मामले में अब तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
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