
इंदौर। हमारे बड़े गणपति इस साल 125 वर्ष के हो गए हैं। इतनी प्राचीन प्रतिमा होने के बाद भी बड़े गणपति हमेशा नित नए ही नजर आते हैं। बप्पा की यह बैठी हुई मुद्रा 25 फीट ऊंची मूर्ति जब शृृंगारित होती है तो इसके दर्शन से भक्त रोमांचित हो उठते हैं।
आगामी गणेशोत्सव के लिए भव्य स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। उल्लेखनीय है कि बड़े गणपति की विशाल प्रतिमा को बनाने में करीब तीन साल का समय लगा था और इसका निर्माण कार्य 17 जनवरी 1901 को पूरा हुआ। भगवान की 25 फीट की मूर्ति को सवा मन घी और सिंदूर का चोला चढ़ाया जाता है। प्राचीन समय में गणेशजी के अनन्य भक्त स्व. पं. नारायण दाधीच को एक स्वप्न आया था। भगवान गणेश ने नारायण को ऐसी ही मूर्ति के रूप में दर्शन दिए थे। स्वप्न की घटना के बाद ही इस भव्य मंदिर का निर्माण हुआ। मूर्ति 4 फीट ऊंचे चबूतरे पर विराजित है। प्रतिमा को बनाने में तीर्थ स्थानों का जल, काशी, अयोध्या, अवंतिका और मथुरा की मिट्टी के साथ घुड़साल, हाथीखाना, गौशाला की मिट्टी और रत्नों में हीरा-पन्ना, पुखराज, मोती, माणिक के साथ ईंट, बालू, चूना और मैथी के दाने के मसाले का इस्तेमाल किया गया है।
वर्ष में चार बार चढ़ता है चोला
बड़े गणेश के शृंगार में करीब 15 दिन का समय लगता है। वर्ष में चार बार चोला चढ़ाया जाता है, जिसमें भाद्रपद सुदी चतुर्थी, कार्तिक बदी चतुर्थी, माघ बदी चतुर्थी और बैशाख सुदी चतुर्थी पर चोला और सुंदर वस्त्रों से शृंगार किया जाता है। चोले में सवा मन घी और सिंदूर का उपयोग किया जाता है। भक्तों के कल्याण के लिए मंदिर में बालाजी का मंदिर भी बना है। सभी इनके दर्शन करके भी अपनी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
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