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इंदौर: MR-11 में रसूखदारों के कब्जे और बस्ती हटाने में छूटे प्राधिकरण के पसीने

July 17, 2026

  • साढ़े तीन किलोमीटर सडक़ का ही निर्माण नहीं हो पाया पूरा
  • डेढ़ किलोमीटर के हिस्से की बाधाओं को हटाने के लिए सालभर से चल रही है मशक्कत

इंदौर। मास्टर प्लान के साथ प्राधिकरण एमआर-11 की सडक़ों का निर्माण भी तय समय सीमा में पूरा नहीं कर पाया है। यहां तक कि सिंहस्थ के मद्देनजर एमआर-11, एमआर-12 के निर्माण में भी काफी विलंब हुआ है। यहां तक कि बायपास से एबी रोड को जोडऩे वाली 100 फीट चौड़ी एमआर-11 का निर्माण भी आधू-अधूरा पड़ा है। कुछ रसूखदारों ने कब्जे कर रखे हैं और एक बस्ती भी बाधक है। नतीजतन साढ़े 3 किलोमीटर लम्बी इस सडक़ में दो किलोमीटर का हिस्सा तो लगभग बन गया है, मगर डेढ़ किलोमीटर का हिस्सा रुका पड़ा है और अभी वाहन चालकों को कूदते-फांदते सफर तय करना पड़ता है। बस्ती को शिफ्ट करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना से भी मंजूरी नहीं मिल सकी।


  • एक तरफ एमआर-12 में भी दो हजार से अधिक कच्चे-पक्के मकानों की बस्ती कायम है, जिन्हें शिफ्ट करने का कोई उपयुक्त फार्मुला प्राधिकरण नहीं खोज पाया है। अलबत्ता शासन ने प्रधानमंत्री आवास योजना में नगर निगम की तरह प्राधिकरण को भी बहुमंजिला बिल्डिंग बनाने के अधिकार दे दिए हैं और प्राधिकरण ने इसकी तैयारी भी कर ली है। मगर समस्या यह है कि बहुमंजिला बिल्डिंग बनाने और उसके बाद फ्लेटों को आबंटित करने में 3 से 4 साल का समय लगेगा। तब तक एमआर-11 और एमआर-12 का निर्माण कार्य आधा-अधूरा पड़ा रहेगा और ये दोनों सडक़ें सिंहस्थ के मद्देनजर अत्यंत ही जरूरी है। शासन ने एमआर-12 के अलाइनमेंट का झगड़ा तो सुलझा दिया, जिसके चलते कान्ह नदी पर बन रहे ब्रिज का निर्माण प्राधिकरण ने शुरू करवाया, तो दूसरी तरफ रेलवे क्रॉसिंग पर तीन लेन के ब्रिज के लिए भी ड्राइंग-डिजाइन रेलवे विभाग से मंजूर करवाई जा रही है। मगर एमआर-11 पर रसूखदारों ने रोड का निर्माण बाधित कर रखा है। इसमें खसरा नम्बर 31 की जमीन भी शामिल है, जिस पर राजनीतिक दबाव-प्रभाव प्राधिकरण पर लगातार आता रहा, तो दूसरी तरफ बिल्डर ने नगर तथा ग्राम निवेश से गलत मंजूरी हासिल कर ली और 500 मीटर लम्बाई का काम अटका पड़ा है। इसी तरह एक कॉलोनाइजर ने सरकारी खसरा नम्बर 298 लसूडिय़ामोरी पर ही बाउण्ड्रीवॉल बना रखी है और नाले पर भी पुलिया निर्माण का काम ठप पड़ा है। वहीं एबी रोड से पुलिया के बीच 800 मीटर के हिस्से में जो अवैध बस्ती सालों से कायम है उसे भी क्षेत्र के जनप्रतिनिधि हटाने नहीं दे रहे हैं। उनका कहना है कि पहले बस्ती के लोगों का विस्थापन किया जाए, तब तक ये अवैध निर्माण और अतिक्रमण नहीं हटाने दिए जाएंगे। प्राधिकरण भी हाथ पर हाथ धरकर बैठा है, जिसके कारणडेढ़ किलोमीटर का हिस्सा एमआर-11 का बन ही नहीं पा रहा है।

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