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बाथरूम की दिशा, सफाई और रखरखाव पर दें विशेष ध्यान, वास्तु के अनुसार ये 5 आदतें बदलने से घर का वातावरण हो सकता है अधिक सकारात्मक

July 18, 2026

नई दिल्ली । भारतीय वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) में घर के प्रत्येक हिस्से का अपना अलग महत्व बताया गया है। मान्यता है कि जिस प्रकार रसोई, पूजा कक्ष और मुख्य द्वार की दिशा का प्रभाव घर के वातावरण पर पड़ता है, उसी प्रकार बाथरूम (Bathroom) की स्थिति, स्वच्छता (Cleanliness) और उपयोग की आदतों को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार यदि बाथरूम से जुड़े कुछ सामान्य नियमों का पालन किया जाए तो घर में स्वच्छता के साथ सकारात्मक माहौल (Positive Environment) बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार पारंपरिक वास्तु सिद्धांत (Vastu Principles) हैं और इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाता।

वास्तु मान्यताओं के अनुसार बाथरूम के निर्माण के लिए उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा को अपेक्षाकृत उपयुक्त माना जाता है। माना जाता है कि इन दिशाओं में बना बाथरूम ऊर्जा संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। वहीं घर के मध्य भाग या दक्षिण-पूर्व दिशा में बाथरूम होने को कई वास्तु विशेषज्ञ उचित नहीं मानते। यदि पहले से बना निर्माण बदला नहीं जा सकता, तो स्वच्छता और उचित रखरखाव पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

बाथरूम में पानी की व्यवस्था को भी वास्तु में विशेष महत्व दिया गया है। लगातार टपकते नल को केवल पानी की बर्बादी ही नहीं, बल्कि पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार आर्थिक असंतुलन का संकेत भी माना जाता है। इसलिए किसी भी लीकेज को समय पर ठीक करवाना आवश्यक माना जाता है। साथ ही बाथरूम में अनावश्यक नमी और सीलन न रहने देने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे स्वच्छता प्रभावित होने के साथ वातावरण भी असहज हो सकता है।

वास्तु शास्त्र में साफ-सफाई को सकारात्मक ऊर्जा का आधार माना गया है। इसलिए बाथरूम में टूटी बाल्टियां, बेकार प्लास्टिक की बोतलें, खाली डिब्बे या लंबे समय से अनुपयोगी सामान जमा नहीं करने की सलाह दी जाती है। नियमित सफाई, पर्याप्त रोशनी और हवा का उचित आवागमन बाथरूम को स्वच्छ और उपयोगी बनाए रखने में मदद करता है। उपयोग के बाद बाथरूम का दरवाजा बंद रखना भी कई वास्तु विशेषज्ञ उचित मानते हैं।

शीशे की स्थिति को लेकर भी वास्तु में कुछ सुझाव दिए गए हैं। मान्यता है कि यदि बाथरूम का दर्पण सीधे दरवाजे के सामने हो तो उसे बदलने पर विचार किया जा सकता है। इसके पीछे पारंपरिक विश्वास यह है कि ऊर्जा का अनावश्यक परावर्तन कम होता है। हालांकि यह पूरी तरह वास्तु मान्यताओं पर आधारित विचार है और इसका कोई सार्वभौमिक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

कई लोग बाथरूम में सेंधा नमक रखने की परंपरा का भी पालन करते हैं। वास्तु मान्यता के अनुसार कांच की कटोरी में रखा सेंधा नमक नकारात्मकता को कम करने का प्रतीक माना जाता है। इसे समय-समय पर बदलने की सलाह दी जाती है। हालांकि यह एक पारंपरिक उपाय है और इसे धार्मिक या सांस्कृतिक विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए।


  • विशेषज्ञों का मानना है कि घर की स्वच्छता, नियमित रखरखाव और व्यवस्थित जीवनशैली किसी भी परिवार के लिए लाभकारी होती है। यदि कोई व्यक्ति वास्तु सिद्धांतों में विश्वास रखता है, तो वह इन पारंपरिक सुझावों को अपनी आस्था के अनुसार अपना सकता है। वहीं साफ-सफाई, पानी की बचत और व्यवस्थित रखरखाव जैसे उपाय व्यावहारिक दृष्टि से भी हर घर के लिए उपयोगी माने जाते हैं।

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