
उज्जैन। उज्जैन जिले (Ujjain district) में इस बार मानसून की बेरुखी किसानों पर भारी पड़ रही है। मानसून की शुरुआत में हुई हल्की बारिश के बाद पिछले 15 दिनों से जिले में एक बूंद भी पानी नहीं गिरा है। इसका असर खेतों में साफ दिखाई देने लगा है। करोड़ों रुपये की लागत से बोई गई सोयाबीन की फसल पीली पड़ने लगी है और कई जगह पौधे मुरझाने लगे हैं। महंगे बीज, खाद और दवाइयों पर खर्च करने के बाद अब किसान फसल बचाने के लिए आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। हालात ऐसे हैं कि कई गांवों में किसान अच्छी बारिश की कामना को लेकर मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और मेघ यज्ञ कर रहे हैं।
15 दिन से बारिश नहीं, सूखने लगी सोयाबीन की फसल
किसानों का कहना है कि मानसून की शुरुआत में हुई बारिश से अच्छी फसल की उम्मीद जगी थी, लेकिन पिछले 15 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेतों की नमी खत्म हो गई है। इसका सबसे ज्यादा असर सोयाबीन की फसल पर पड़ा है। पौधे पीले पड़ रहे हैं, पत्तियां झड़ने लगी हैं और कई खेतों में फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है।

कर्ज और फसल दोनों की चिंता
किसानों का कहना है कि उन्होंने महंगे बीज, खाद और कीटनाशक खरीदने के लिए अपनी जमा पूंजी के साथ कर्ज भी लिया है। अब यदि अगले चार से पांच दिनों में बारिश नहीं हुई तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि फसल के लिए लिया गया कर्ज कैसे चुकाया जाएगा।
बारिश के लिए मंदिरों में पूजा-पाठ और मेघ यज्ञ
खेती संकट में आने के बाद जिले के कई गांवों में किसान समूह बनाकर मंदिरों का रुख कर रहे हैं। किसान भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और मेघ यज्ञ कर रहे हैं, ताकि इंद्रदेव प्रसन्न हों और अच्छी बारिश हो सके। किसानों का कहना है कि अब फसल बचाने की उम्मीद केवल भगवान और बारिश से ही है।
किसानों ने बयां किया दर्द
किसान आशीष उपाध्याय ने बताया कि 15 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में दरारें पड़ गई हैं। सोयाबीन के पौधों की पत्तियां झड़ रही हैं और बैंक का कर्ज सिर पर है। अब केवल अच्छी बारिश ही फसल बचा सकती है। सुरेश उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने करीब 20 हजार रुपये का बीज और खाद खरीदा है। यदि फसल खराब हो गई तो बच्चों की फीस तक भरना मुश्किल हो जाएगा। इसी उम्मीद में वह रोज मंदिर जाकर पूजा कर रहे हैं।
रमेश चंद्र नीमा का कहना है कि शुरुआती बारिश से अच्छी उम्मीद बंधी थी, लेकिन अब हालात बिगड़ गए हैं। उन्होंने सरकार से पहले ही मुआवजे की घोषणा करने की मांग की है। नागूलाल सूर्यवंशी ने बताया कि फसल बचाने के लिए रात-रात भर खेतों में पानी दिया जा रहा है, लेकिन अब बोरवेल भी जवाब देने लगे हैं। ऐसे में अब केवल भोलेनाथ का ही सहारा है। किसान शमशुद्दीन ने कहा कि किसान की जिंदगी जुए जैसी हो गई है। कभी कर्ज तो कभी सूखे की मार झेलनी पड़ती है। इस बार किसानों पर दोहरी मार पड़ी है।
उज्जैन स्थित शासकीय जीवाजी वेधशाला (जंतर-मंतर) के वर्तमान मौसम पर्यवेक्षक और अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से 22 जुलाई से उज्जैन जिले में अच्छी बारिश होने की संभावना है। हालांकि तब तक जिले के किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं और मंदिरों में बारिश की प्रार्थनाएं लगातार जारी हैं।
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