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थोक में सब्जियों के दाम गिरे, उपभोक्ताओं को भी मिल सकती है राहत

September 07, 2026

  • मंडी में आलू के दाम अभी भी तेज-खेरची में 30 से 40 रुपए किलो के भाव पर बिक रहा

उज्जैन। बारिश के बाद सब्जियों की आवक बढऩे से चिमनगंज मंडी में कई हरी सब्जियों के थोक भाव में गिरावट आई है। बम्पर आवक के चलते लौकी, बैंगन, कद्दू और टमाटर जैसी सब्जियां निचले भाव पर बिक रही हैं। इसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए, लेकिन मंडी से खेरची बाजार तक पहुंचते-पहुंचते इनके दाम में अंतर दिखाई दे रहा है।
मंडी में फिलहाल लौकी 2 से 3, बैंगन 4 से 6, कद्दू 3 से 8 और आलू करीब 20-35 रुपए किलो थोक में बिक रहा है। हरी मिर्च 8 से 15, टमाटर 10 से 15, धनिया 8 से 10 और भिंडी 8 से 12 रुपए किलो के आसपास है। गिल्की, तुरई, मैथी और सुरजनाफली के भाव 25 से 40 रुपए किलो के बीच हैं।



  • थोक से खेरची तक क्यों बढ़ता है भाव
    मंडी कारोबारियों के अनुसार थोक भाव और उपभोक्ता द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत के बीच अंतर का कारण केवल मुनाफा नहीं है। मंडी से माल दुकानों और ठेलों तक पहुंचाने में परिवहन, हम्माली, छंटाई और खराब होने वाली सब्जियों का नुकसान भी जुड़ता है। दिनभर में माल नहीं बिकने पर खराबे का जोखिम भी विक्रेता को उठाना पड़ता है। हालांकि, कुछ सब्जियों में थोक और खेरची भाव के बीच अंतर अधिक होने पर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। ऐसे में बंपर आवक से आई मंडी की मंदी का लाभ बाजार स्तर तक पहुंचना जरूरी है।

    कम भाव चिंता का कारण
    आवक बढऩे से जहां उपभोक्ताओं के लिए सब्जियों के सस्ते होने की संभावना बनी है, वहीं किसानों के लिए कम थोक भाव चिंता का विषय है। कई उत्पादों के भाव उनकी अपेक्षित लागत के अनुरूप नहीं मिल पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि उत्पादन, मजदूरी और परिवहन की लागत निकालने के बाद ही उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए।

    उपभोक्ताओं के लिए राहत 
    मंडी में कम भाव का असर यदि खेरची बाजार तक पहुंचता है तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को सब्जियां अपेक्षाकृत सस्ती मिलती रहेगी । ग्राहक अलग-अलग दुकानों और ठेलों पर भाव की तुलना करें और संभव हो तो मंडी के आसपास के बाजारों में उपलब्ध कीमतों की जानकारी लेकर खरीदारी करें।

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